कविता- बस जी लूँ जरा

प्यार कभी नही मरता….
बस सांसे साथ छोड़ देती है,
वरना हमे उनसे साथ मोहब्बत कितनी
ये एक रोज उनको बता देती मैं
कभी खत्म न होती मोहब्बत हमारी
हर रोज एक नई दास्तान लिखती मैं
तुमको रोज पढ़ती उस किताब के जैसे
तुमसे मिलती एक खत्म न होने वाली मुलाकात की तरह,
रोज नए किस्से लिखते मोहब्बत के खातिर,
और हर रोज तुम्हारी तसवीर बनाती
कभी तुम जो कहते कि रूठ जाओगे
तो हम हाथों को थाम कर तुम्हारे
मना ही लेते है, कुछ रूठना लिखती तुम्हारा
हर रोज नई बाते करते ,हर रोज संवरती मैं
बस अब ये सब ख्वाब सा लगता है
बस खुद को यूँ मायूसी की नज़रों से देखना है
मगर फितरत नही की बदल जाएंगे हम
अगर सोचते हो कि हम भूल जायेगे तुम्हे
तो सिर्फ वहम है मेरे सनम।।

परिचय - उपासना पाण्डेय

पूरा नाम- आकांक्षा पाण्डेय उपनाम- उपासना जन्मस्थान-आजाद नगर हरदोई (उत्तर प्रदेश) लौकिक शिक्षा-स्नातक(बी.एस.सी. ) लेखन-2017 जून से अभी तक. वर्तमान लेखन- दैनिक और साप्ताहिक अखबारों में कविताये,शब्दनगरी ,प्रतिलिपी वेबसाइट पर,मासिक पत्रिका,चहकते पंछी ब्लॉग पर कविताये।