जिंदगी

कभी हंसती , कभी रोती ,
कभी तू मुस्कुराती है
कभी खुलकर तू गाती है ,
कभी तू गुनगुनाती है
तू जैसी भी है सुन ऐ जिंदगी
हरदम लुभाती है ।।

कभी गम के हैं साये तो ,
कभी रंगीनियां भी हैं
कभी तू त्याग करती है ,
जुबां भी लपलपाती है
तू जैसी भी है सुन ऐ जिंदगी ,
हरदम लुभाती है ।।

कभी डरती डराती है ,
कभी तू हड़बड़ाती है
कभी चलती संभल कर तू ,
कभी तू गड़बड़ाती है
तू जैसी भी है सुन ऐ जिंदगी ,
हरदम लुभाती है ।।

घिरे हों गम के अंधेरे ,
या खुशियों के उजाले हों
न हो मायूस एक पल भी ,
जो सब उसके हवाले हों
तू उम्मीदें जगाती है ,
तू दिल को हर्षा जाती है
तू जैसी भी है सुन ऐ जिंदगी ,
हरदम लुभाती है ।।

तू हर पल , हर घड़ी हमको ,
सबक कुछ दे के जाती है
समय एक सा नहीं रहता ,
यही सबको बताती है
तू क्या कहती औ क्या करती ,
नहीं दुनिया समझती है
तू जैसी भी है सुन ऐ जिंदगी ,
हरदम लुभाती है ।।

परिचय - राजकुमार कांदु

मुंबई के नजदीक मेरी रिहाइश । लेखन मेरे अंतर्मन की फरमाइश ।