प्रलय आ जाता है – जयति जैन “नूतन”

जब हवाये संदेश नहीं ले जाती
तुम तक पैगाम नहीं पहुचाती !
गुस्सा आता है बहुत मुझे
जब तुम्हे मेरे पास नहीं लाती !
रूठ जाती हुं अक्सर जब भी
तेज झोंके से मुझे डराती है !
सहम जाती हुं मैं तब
और तुम्हारी याद बहुत सताती है !
ये बैरन हवा ! मुझ पर हंसती है
मुझे जोगन बताती है !
इसे क्या पता प्रीत होती क्या है नूतन
ये जरिया है जो तुमतक संदेश पहुचाती है !
जी तो करता है इसे कैद करके रखदुं कहीं
जब भी ये बिना पैगाम के लौट आती है !
अगले ही पल ठहर जाती हुं मैं सोचकर
यही एक उम्मीद है जो मेरा प्रेम तुम तक पंहुचा सकती है
ना जाने कैसी दुश्मनी है इसकी मुझसे
तुमको करीब क्युं ? नहीं लाती है !
वो तो कान्हा बन रासकर रहा है
रोज़ कानों में ताने कस जाती है
ऐसी क्या मज़बूरी, ऐसी क्या लाचारी ?
जो तुमको मेरे पास आने नहीं देना चाहती है !
मैं जानती हुं प्रिय
मेरा संदेश तुम तक पंहुचा जरुर होगा,
लेकिन
ये सौतन सी हवा
तुम्हारा संदेश मुझतक नहीं पहुचाती है !

लेखिका-जयति जैन “नूतन”

परिचय - जयति जैन 'नूतन'

=परिचय- पूरा नाम- DRx जयति जैन उपनाम- शानू, नूतन लौकिक शिक्षा- डी.फार्मा, बी.फार्मा, एम. फार्मा (रिसरचर) वर्तमान लेखन-= सामाज़िक लेखन, दैनिक व साप्ताहिक अख्बार, पत्रिकाएं चहकते पंछी ब्लोग, साहित्यपीडिया, शब्दनगरी व प्रतिलिपि वेबसाइट पर पता - = जयति जैन c/o डा. प्रमोद कुमार जैन पारस होस्पिटल बस स्टैंड रानीपुर जिला झांसी उ.प्र. 284205