मददगार

भूख से तड़प तड़प कर मर चुके ‘ कलुआ ‘ के घर गांव के सरपंच साहब पहुंचे । मीडिया कर्मी पहले ही पहुंचे हुए थे । पिता के शव से लिपट कर करुण क्रंदन कर रही मुनिया के आंसू पोंछते हुए सरपंच साहब बोले ” चुप हो जा बेटी ! हम सब गांव वाले तेरे अपने ही हैं न ! किसी भी चीज की जरूरत हो निस्संकोच मांग लेना ।”

परिचय - राजकुमार कांदु

मुंबई के नजदीक मेरी रिहाइश । लेखन मेरे अंतर्मन की फरमाइश ।