साथ हर पल दिया पर निभा तू नहीं

साथ हर पल दिया पर निभा तू नहीं
दर्द में बन चिरागे जला तू नही

कोशिशें की कई मर्तबा रोज पर
डाल सा नर्म होकर झुका तू नही

आँधियाँ चल रही नफरतों की यहाँ
प्रेम दिल में जगे वो खुदा तू नही

बादलों ने सुनाया मधुर राग जब
नेह की बारिशों में पिला तू नही

खोल ली आज सारी गिरह द्वेष की
चाह कर भी कभी हमनवा तू नही

जख्म जो देह को अब तलक है मिले
घाव हो ठीक पर वो दवा तू नही

जिस्म को भस्म कर दे सदा के लिए
उस विरह अग्नि में क्यों तपा तू नही

परिचय - डॉ मधु त्रिवेदी

जन्म तिथि --25/05/1974 पद ---प्राचार्या शान्ति निकेतन काॅलेज आॅफ बिज़नेस मैनेजमेंट एण्ड कम्प्यूटर साइन्स आगरा email -madhuparashar2551974@gmail.com रूचि --लेखन कवितायें ,गजल , हाइकू 20 से अधिक प्रकाशित Reference Books --"टैगोर का विश्व बोध दर्शन नागार्जुन के काव्य साहित्य में प्रगतितत्व अन्य Text Books