चार साल बेमिशाल!

रामचरित मानस में धनुष भंग के बाद लक्ष्मण-परसुराम संवाद बड़ा रोचक प्रसंग है जहाँ परशुराम लक्ष्मण को अपने बारे में बहुत कुछ बतलाने के बाद भी विश्वामित्र मुनि से कहते हैं –   कौसिक सुनहु मंद यहु बालकु। कुटिल कालबस निज कुल घालकु

तुम्ह हटकहु जौं चहहु उबारा। कहि प्रतापु बलु रोषु हमारा

अर्थात यह मंद बालक मेरे प्रताप बल और क्रोध को नहीं जानता है अगर आप इसे बचाना चाहते हो तो मेरे बारे में बतलाओ ….. इसपर लक्ष्मण जी चुटकी लेते हुए कहते हैं—

लखन कहेउ मुनि सुजसु तुम्हारा। तुम्हहि अछत को बरनै पारा॥
      अपने मुँह तुम्ह आपनि करनी। बार अनेक भाँति बहु बरनी

नहिं संतोषु त पुनि कछु कहहू। जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू॥
बीरब्रती तुम्ह धीर अछोभा। गारी देत न पावहु सोभा॥

सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु।
बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु॥

अर्थात, शूरवीर तो युद्ध में करनी (शूरवीरता का कार्य) करते हैं, कहकर अपने को नहीं जनाते। शत्रु को युद्ध में उपस्थित पाकर कायर ही अपने प्रताप की डींग मारा करते हैं

इसी प्रसंग को मैं यहाँ मोदी जी से जोड़ना चाहता हूँ. ऐसा कोई भी मौका शायद ही हो जब मोदी जी ने अपने आप की उपलब्धियाँ नहीं गिनाई हो और कांग्रेस सहित दूसरे विपक्षी दलों को न कोसा हो. फिर भी हर साल का जश्न और इस बार चार साल का जश्न … सारे अखबार और दृश्य मीडिया मोदी जी के कार्यकाल का गुण गा रहे हैं. मोदी जी दल-बल समेत सभी मंत्री-संतरी गुणगान में लगे हैं. मोदी जी एक ही बात को कितनी बार रिपीट करते हैं उन्हें भी नहीं याद होगा! फिर वही बात को दृश्य मीडिया दिन भर बार-बार रिपीट करता है. ब्रह्मा विष्णु महेश जिस प्रकार भगवान के गुण गाते थे… वैसे ही मोदी जी के गुणों का बखान दिन-रात चल रहा है. धरातल पर चाहे जो हो पर विज्ञापनों में काम दिखता है.

मोदी सरकार के चार साल पूरे होने के दिन भी पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़े हैं. 13 मई से 26 मई के बीच पेट्रोल के दाम में 3.86 रुपये और डीज़ल के दाम में 3.26 रुपये की वृद्धि हो गई है. कर्नाटक चुनाव ख़त्म होते ही अख़बारों ने लिख दिया था कि चार रुपये प्रति लीटर दाम बढ़ेंगे, करीब करीब यही हुआ है. यानी दाम बढ़ाने की तैयारी थी. लेकिन अमित शाह ने बोल दिया कि सरकार घटाने पर प्लान बना रही है. एक दो दिन से ज़्यादा बीत गए मगर कोई प्लान सामने नहीं आया. हम सब समझते हैं कि तेल के दाम क्यों बढ़ रहे हैं, मगर सरकार में बैठे मंत्री को ही बताना चाहिए कि विपक्ष में रहते हुए 35 रुपये प्रति लीटर तेल कैसे बिकवा रहे थे. आज के झूठ की माफी नहीं मांग सकते तो पुराने बोले गए झूठ की माफी मांग सकते हैं. जिस तरह से सोशल मीडिया पर कुतर्कों का जाल बुना गया है, वह बताता है कि यह सरकार जनता की तर्क बुद्धि का कितना सम्मान करती है.
सरकार आई तो खूब दावे किए गए कि कोयले के खदान के लाइसेंस दिए गए हैं. उनमें पारदर्शिता आई है. क्या आपको पता है कि कितने खदान चालू हुए और कितने चालू ही नहीं हुए. इसका कारण जानेंगे तो और दुख पहुंचेगा कि सरकार के कितने झूठ का पर्दाफाश होते देखें, इससे अच्छा है कि चलो भक्त ही बन जाया जाए, कम से कम सोचना तो नहीं पड़ेगा. हालत यह है कि दो हफ्ते में दो बार सरकार कोल इंडिया को लिख चुकी है कि कोयले का उत्पादन बढ़ाइये और बिजली कंपनियों को दीजिए क्योंकि गर्मी में मांग बढ़ गई है. क्या सरकार को पता नहीं था कि जब बिजली पहुंची है तो गर्मी हो या सर्दी, मांग भी बढ़ेगी. गर्मी का बहाना कर रही है मगर सितंबर से दिसंबर के बीच भी कोयले की आपूर्ति कम थी. कोयले की कमी से 2017 में भी बिजली के उत्पादन पर असर पड़ा था. उत्पादन घटा था.
रिटायर हो चुके लोगों को अब न्यू पेंशन स्कीम का झांसा समझ आ रहा है. 14-15 साल से चले आ रहे इस स्कीम के तहत जो रिटायर हो रहे हैं उन्हें पेंशन के नाम पर 1200-1300 रुपये मिल रहे हैं. नतीजा यह है कि आज जब हाथ में 1300 रुपये देख रहे हैं तो समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें. मोदी-मोदी करें या राम-राम करें.
EPFO प्रोविडेंट फंड की ब्याज़ दर पांच साल में सबसे कम हो गई है. 5 करोड़ लोगों को 2017-18 के लिए 8.55 प्रतिशत ब्याज़ ही मिलेगा. 2012-13 के बाद यह सबसे कम है.

पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा इन सब का घाटा देखिए. इनका घाटा इतिहास बना रहा है. आईडीबीआई का सकल एनपीए 28 फीसदी हो गया है. एक बैंकर ने कहा कि सरकार जब दावा करती है कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हो रहा है. निवेश हो रहा है तो फिर वही बता दे कि स्टील उद्योग क्यों संकट में हैं. क्यों स्टील उद्योग से एनपीए हो रहा है. हम सामान्य लोग सरकार के फर्ज़ीवाड़े को नहीं समझ पाते मगर बैंकर की एक लाइन से तस्वीर खींच जाती है. एक लक्ष्मी विलास बैंक है उसे भी 600 करोड़ का घाटा हुआ है. बैंक का पूरा सिस्टम ध्वस्त है. बैंक कर्मी इतनी कम सैलरी में काम कर रहे हैं कि पूछिए मत. 17500 रुपये की सैलरी में कोई बैंक क्लर्क दिल्ली शहर में कैसे रह सकता है. सरकार को पता है कि बैंक समाप्त होने की स्थिति में हैं. इसलिए उन्हें कभी मुद्रा लोन के फर्ज़ीवाड़े का टारगेट दो तो कभी अटल पेंशन योजना का. यही नहीं, बैंक अब आधार कार्ड भी बनवा रहे हैं. इन सबके बाद भी बैंकरों की सैलरी नहीं बढ़ रही है. बैंकर रोज शाम को काम ख़त्म होने के बाद ब्रांचों के बाहर प्रदर्शन करते हैं. लाखों बैंकरों की ज़िंदगी तबाह हो चुकी है. उनके ये पांच साल कभी नहीं लौटेंगे. नोटबंदी जैसे फ्रॉड को वे देशसेवा समझ रहे थे. इसलिए ज़रूरी है कि नागरिक अपनी समझ का विस्तार करें.
वही हाल दो लाख ग्रामीण डाक सेवकों का है. इनकी सैलरी नहीं बढ़ी है. ये लोग 5000 रुपये में कैसे जीते होंगे. सरकार इन्हें हिन्दू ही समझ कर सैलरी दे दे या भक्त सरकार से कहें कि ये हिन्दू हैं और इन्हें तकलीफ है. 12 दिनों से हड़ताल पर हैं मगर कोई इनसे बात करने को तैयार नहीं. ग्रामीण डाक सेवकों के साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा है.
कोबरा पोस्ट का स्टिंग पर स्टे भले लग गया हो पर तथ्यों की जांच तो होनी चाहिए. अगर हम सिर्फ अनदेखी ही करते रहेंगे तो फिर ऐसे ख़तरों के लिए तैयार रहिए जिसकी कल्पना हमने आपने नहीं की है. क्योंकि इनकी मार हमलोगों पर ही पड़ेगी जैसे लाखों बैंकरों पर पड़ रही है. स्टिंग से पता चलता है कि मोबाइल कंपनी, पेटीएम कंपनी ने अपना डेटा सरकार को दिया है. यही बात अमरीका में सामने आई होती तो हंगामा मच गया होता. रविशंकर प्रसाद फेसबुक को तो ललकार रहे थे, क्या इस स्टिंग के बाद पेटीएम पर कुछ कर सकते हैं? आने वाले चुनाव में खेल बिग डेटा से होगा. उसकी तैयारी हो चुकी है. इस विषय को समझने वाले बहुत दिनों से बता रहे हैं. देखते हैं क्या हो रहा है.
मगर ऐसा कौन सा सेक्टर है जिसके लिए सरकार जश्न मना सकती है? एक झूठ और दूसरा धर्मांधता. हर सरकार के दौर में एक राजनीतिक संस्कृति पनपती है. मोदी सरकार के दौर में झूठ नई सरकारी संस्कृति है. जब प्रधानमंत्री ही झूठ बोलते हैं तो दूसरे की क्या कहें. दूसरी संस्कृति है धर्मांधता की. भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस से से इत्तफाक रखने वाले कई संगठन बनकर खड़े हो गए हैं जो काम तो इन्हीं के लिए करते हैं मगर अलग इसलिए हैं ताकि बदनामी इन पर न आएं.
नौकरी के फ्रंट पर यह सरकार फेल है. आप किसी युवा से पूछ लें जो परीक्षा की तैयारी कर रहा है. रेलवे ने बड़े ज़ोर ज़ोर से ऐलान किया कि एक लाख भर्ती निकाली जा रही है. जबकि रेलवे में ढाई लाख वैकेंसी है. क्या आप जानते हैं कि दो महीने हो गए फार्म भरे, अभी तक इम्तहानों की तारीख नहीं निकली है. एम्स को लेकर प्रोपेगैंडा होता है, क्या आप जानते है कि 6 एम्स में नॉन टेक्निकल स्टाफ के 80 फीसदी पोस्ट खाली हैं.

बेरोजगारी की समस्या पर कुछ प्रवक्ता चिंतित हैं तो कुछ के अनुसार ९ करोड़ लोगों को रोजगार दिया जा चुका है. यानी कि दो करोड़ प्रति वर्ष के हिशाब से भी ज्यादा … अगर यही सत्य हि तो चिंता की कोई बात नहीं. सभी नौजवान तैयार हैं मोदी जी को फिर से जिताकर सत्ता में लाने के लिए. विपक्ष की एकता एक सगूफा ही साबित होगा या कोई परिणाम निकलेगा…. यह तो समय ही बताएगा … पर फिलहाल तो यही लगता है कि अगले साल और उसके बाद फिर से ५ साल का जश्न मनाने का मौका मोदी जी और शाह जी को ही मिलेगा. यही है श्रेष्ठ लोकतंत्र और विश्वगुरु भारत!

फिलहाल CBSE के परिणाम पर खुश हो लें! बेटियों ने फिर बाजी मारी है. कम से कम एक नारा तो सत्य हो – बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ!

– जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.