पिछली सरकारों में केवल अपराध और अराजकता का किया गया भारी निवेश

वर्तमान समय में प्रदेश की राजनीति में विपक्षी दलों की ओर से महागठबंधन बनने के बाद अब इन सभी दलों के नेता प्रदेश की भाजपा सरकार और केंद्र की मोदी सरकार को पूरी तरह से नाकाम बताने के लिए पूरी तरह से अपनी ताकत और बुद्धि लगा रहे हंै। यह प्रदेश की जनता अच्छी तरह से देख व समझ रही है कि पूर्व में किन दलों की सरकारें थीं तथा उन सरकारों मंें कैसे-कैसे गुल खिलाये गये थे। अपने उन पापों को छुपाने तथा अपने राजनैतिक अस्तित्व को बचाये रखने के लिए अब यही दल महागठबंधन बनाकर जनता की आंखों में धूल झोंकने का अक्षम्य अपराध कर रहे हैं। सपा और बसपा कभी एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते थे, वही दोनों आज अपने पापों को छुपाने के लिए एक होकर हमला बोल रहे हैं।
सबसे अधिक हंसी इस बात पर आ रही है कि जिसके कार्यकाल में रोज औसतन दस युवतियों के साथ बलात्कार और सामूहिक बलात्कार की घटनाओं को अंजाम दिया जाता था, आज उसी सरकार का पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव महिला डकैत फूलन देवी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बीजेपी व योगी सरकार को बच्चियों की सुरक्षा करने में नाकाम बता रहा है। जबकि आज वास्तव में योगी शासन में महिलाओं में सुरक्षा की भावना एक बार फिर जागृत हो रही है। समाजवादी सरकार वह सरकार थी जिसमें महिलाओं व बच्चियों का भरी दोपहरी घर से बाहर निकलना दुश्वार हो गया था। सपा नेता मुलायम सिंह यादव कभी कहते थे कि लड़कों से गलतियां हो जाती हैं। समाजवादी नेता तो संसद में महिला आरक्षण के प्रबल विरोधी रहे हैं। समाजवादियों को पता नहीं कबसे महिला सुरक्षा व महिला सशक्तीकरण की ंिचंता सताने लग गयी है। बसपा सुप्रीमो मायावती को अपने विधायकोें की करतूत तो अवश्य याद रखनी चाहिये। प्रदेश के राजनैतिक इतिहास में सबसे अधिक बलात्कारी और छेड़छाड़ के आरोपी विधायक बसपा में ही हैं। बसपा सरकार के कार्यकाल में इन विधायकों का खौफ सिर चढ़कर बोल रहा था तथा कई विधायकों को सरकार व पार्टी से निकालना तक पड़ गया था। आज वहंी पूर्व मुख्यमंत्री बीजेपी को महिला सुरक्षा के नाम पर अपनी सीख दे रही हैं और सरकार को नाकाम बता रही हैं। जबकि इन सरकारों में हिंदू-मुस्लिम तनाव बराबर बना रहता था।
आज प्रदेश का मुसलमान एक बार फिर बीजेपी को हराने के लिए सपा-बसपा की गोद में जाने को तैयार बैठा है लेकिन उसे समाजवादी सरकार का मुजफ्फरनगर दंगा याद रखना चाहिए। समाजवादी सरकार में तो दंगों की एक लम्बी श्रंखला चल गयी थी, जिसमें प्रदेश की जनता ने उनको अच्छी तरह से बाहर का रास्ता दिखा दिया। आज वही सपा और बसपा सरकोर बीजेपा को कानून व्यवस्था के मामले में नाकाम बता रही है। सपा और बसपा की सरकारों में केवल भीड़ तंत्र की हिंसा, हर प्रकार के अपराधों तथा अराजकता का ही बोलबाला रहा है। असल बात यह है कि समाजवादी और बसपा की सरकारों ने प्रदेश को इस कदर लूटा है तथा जमकर अराजकता मचायी है कि उसके कारण सभी लोगों में अंदर ही अंदर भय व्याप्त हो गया है। आज भीड़ की हिंसा पर बीजेपी व संघ को बिना सही तथ्यों की जांच पड़ताल के घेरने में लगे हैं। लेकिन बसपा नेत्री मायावती को वह बात नहीं भूलनी चाहिये कि उन्ही की पार्टी के नेताओं नसीमुद्दीन सिद्दीकी आदि ने भीड़ को एकत्र करके किस प्रकार बीजेपी नेत्री व प्रदेश सरकार की मंत्री स्वाति सिंह व उनकी बेटी को डराया धमकाया था तथा एक और मंत्री श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी के घर को भी भीड़ के सहारे ही जलाया गया था। माब लिचिंग के सहारे ही इन दलों के कार्यकर्ता ब्राह्मण सहित समस्त सवर्ण समाज के लोगोें पर अत्याचार किया करते थे। आज जो माब लिचिंग हो रही है उसमें भी कहीं न कहीं इन्हीं दलों का हाथ है।
आज सपा और बसपा प्रदेश की जनता से पूरी तरह से कट चुकी है तथा इन नेताओं को रैलियां करने व उनमें भीड़ बुलाने में पसीना आ रहा है। बसपा नेत्री मायावती की हालत इतनी दयनीय है कि वह अपने लिये सुरक्षित संसदीय क्षेत्र नहीं तलाश कर पा रही हैं और कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास न ध्वस्त हो जाये इसलिये स्वयं को पीएम के पद के लिए प्रोजेक्ट करने का प्रयास कर रही हैं। सपा और बसपा अब अपना क्षेत्रीय पार्टी का रुतबा भी खो रही और यही कारण है कि यह सभी दल कांग्रेस की गोद में बैठकर महागठबंधन के सहारे अपनी राजनीति को जीवित रखने का सपना संजो रही हैं।
पिछली सरकारों मे इतनी घोर अराजकता व्याप्त थी कि प्रदेश के सभी 74 जिलों के परिषदीय विद्यालयों में की गयी भर्तियों की सीबीआई जांच की जा रही है। प्रदेश के कई जिलों में प्राथमिक विद्यालयों के नाम में इस्लामिया जोड़कर रविवार के बजाय शुक्रवार को अवकाश रखने का महापाप किया जा रहा था। ऐसा सुनियोजित तरीके से किया गया। इन सभी मामलों की जांच की जा रही है। एक प्रकार से सपा राज में सरकारी स्कूलों का इस्लामीकरण करने की साजिश चल रही थी। यह एक बेहद गम्भीर मामला है जिसकी जांच चल रही है तथा प्रदेश सरकार व स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रूख अपनाया हुआ है।
प्रदेश में नयी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कड़ी मेहनत व पीएम मोदी के प्रयासों से भारी मात्रा में निवेश आ रहा है तथा विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास, लोकार्पण व उद्घाटन तक हो रहे हैं। उसी समय पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव यह झूठा दावा कर रहे हैं कि अब तक जो लोग केवल हमारे कामों का ही उद्घाटन कर रहे थे, वो अब हमारी निवेश की योजनाओं को भी नया जामा पहनाकर फिर से निवेश कर रहे हैं। वह बीजेपी सरकार की योजनाओं को हवा हवाई बताकर उनका मजाक उड़ा रहे हैं। यह बात साफ प्रतीत हो रही हे कि अखिलेश यादव व अन्य विरोधी दलों के नेता केवल अपने कुकृत्यों को छिपाने के लिए इस प्रकार की ओछी हरकते कर रहे हैं तथा अपनी विफलता की महा भड़ास निकाल रहे हैं।
यदि इन सरकारों ने कोई काम किया होता तो आज प्रदेश का यह हाल न होता। सपा और बसपा की सरकारों में केवल लूट और अराजकता का माहौल था। इन दलों ने अपने हिसाब से प्रदेश को लूटा तथा जनता को ठगा है। यहां तक कि अंतिम क्षणों में तो सरकारी बंगले तक को लूटकर ले गये। जिन फाइलों को आज खोला जा रहा हैं हर फाइल से घोटालों की बुू आ रही है तथा उनमें स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री तथा उनके रिश्तेदार व सहयोगी फंसते नजर आ रहे हंै। लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट घोटाले से लेकर यमुना-एक्सप्रेस वे सहित सपा के सबसे मनपसंद आजम खां तक सभी भ्रष्टाचार के दलदल में गहरे तक धंसे हैं। इन लोगों ने बड़ा काम किया है, तभी मायावती व अखिलेश यादव को एक-एक सीट जीतने के लिए महागठबंधन करना पड़ रहा है तथा फतवे जारी करवाने पड़ रहे हैं।
ये दोनों दल बहुरूपिया हैं तथा आजकल एक नया अभियान भी चला रखा है कि केंद्र में पांच साल तथा यूपी में योगी सरकार के 16 माह होने को आ रहे हैं, लेकिन यह लोग अभी तक राम मंदिर नहीं बनवा सके तथा जनमानस को बरगला रहे हें। हिंदू जनमानस यह अच्छी तरह से देख रहा है कि भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनवाने में कौन-कौन से दल सबसे अधिक रोड़े अटका रहे हैं। अयोध्या में गोलियां तो यादव परिवार ने ही चलवायी थीं और हिंदुओं पर सबसे अधिक अत्याचार सपा और बसपा सरकारों में ही हुए थे। आज इन लोगों से राम मंदिर क्यों नहीं बन रहा कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण व दुखद है। ये दल आस्तीन के जहरीले सांप हैं, जो समय के साथ और अधिक निखरते जा रहे हैं। एक तरफ कहते हैं कि राम मंदिर नहीं बन रहा, वहीं दूसरी ओर जब श्रीराम का नाम लोग बोलते हैं तो वह हाय-हाय करने लग जाते हैं। इन दलों की सरकारों ने केवल अपराध, अराजकता, घोटालों तथा भ्रष्टाचार का ही घोर निवेश किया है। उनको बीजेपी से सवाल करने की बजाय आत्मचिंतन करना चाहिए और शांति व धैर्य के साथ समय का इंतजार करना चाहिए।
मृत्युंजय दीक्षित