आधार पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक, विपक्ष का झूठा प्रचार ध्वस्त

सुप्रीम कोर्ट ने आधार पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है जिसका लम्बे समय से इंतजार हो रहा था तथा इस फैसले पर पूरा भारत ही नहीं अपितु विश्व के कई देशों में भी निगाह थी। आधार को अब एक व्यापक व संतुलित पहचान मिल गयी है। आधार अब संवैधानिक व वैध व्यवस्था बन गया हैं। जब कोर्ट में 27 याचिकाओं पर सुनवाई चली रही थी तब ऐसा लग रहा था कि सभी आधार विरोधी विशेषज्ञ किसी न किसी प्रकार आधार को ही पूरी तरह से खारिज करवाना चाहते हैं, लेकिन उनकी साजिशें सफल नहीं हो सकीं। सुनवाई के दौरान व उसके बाद भी फैसला आने तक आधार के खिलाफ साजिशें होती रहीं। लेकिन केंद्र सरकार अपने निर्णय पर अडिग रही तथा सुनवाई के दौरान अपना पक्ष मजबूती से रखा जिसका नतीजा साफ आया है। आज आधार से वाकई धीरे-धीरे आराम हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि अभी कई जगहों पर आधार की अनिवार्यता को समाप्त भी कर दिया है तथा उसके लिए सरकार को संशोधन भी लाना पडेगा लेकिन अगर सरकार व एजेंसियों ने यह ठान लिया कि दूरसंचार के क्षेत्र में भी आधार जरूरी है, तो वह उसे कानून में संशोधन करके तथा कंपनियों को कड़े नियमों के साथ इसे लागू करवा सकती है। लेकिन अब ये सब काम 2019 के बाद ही होंगे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की पंाच जजों की बेंच ने यह फैसला 4-1 के बहुमत से सुनाया है जिस पर अब यह विवाद स्वतः समाप्त हो जाना चाहिए लेकिन आज के राजनैतिक और कानूनी हालातों को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आज नहीं तो कल यह मामला एक बार फिर सर्वोच्च अदालत की चैखट पर पहुंचेगा।
सुनवाई के बाद आये फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण बिदुओं को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है तथा जिस पर अब कोई वाद विवाद नहीं होना चाहिए। आधार की वैधता पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने साफ कहा है कि आधार से किसी की निजता का उल्लंघन नहीं होता है। कोर्ट ने कहा कि हिंदी शब्द आधार का उपयोग अब इसके शब्दकोष वाले अर्थ के लिए ही नहीं किया जाता बल्कि सभी लोग इसे व्यक्ति की पहचान वाले पत्र से पहले जोड़कर देखते हैं। जो एक तरह से डिजिटल अर्थवयवस्था का प्रतीक बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि आधार पर हमला संविधान पर हमला है। यह एक बहुत ही बड़ी और गंभीर टिप्पणी है, जिसे सभी याचिकाकर्ताओं को अच्छी तरह से जानना और समझना चाहिए। सब्सिडी प्राप्त करने के लिए व योजनाओं में खामियों को दूर करने के लिए आधार पूरी तरह से सक्षम है। आधार अब भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में भी प्रमुख भूमिका अदा करने जा रहा है यह फैसले से साफ हो गया है। अपनी विदेश यात्राओं के दौरान तथा भारत के अंदर जनसभाओं में पीएम नरेंद्र मोदी आधार के विषय में उल्लेख करते रहे हैं तथा जजों ने अपने फैसले में उनके संदेशों को शामिल कर उनका बोझ हल्का कर दिया है तथा उनको भी मानसिक मजबूती प्राप्त हुई है।
आज आधार का फैसला आने के बाद कांग्रेस व ममता बनर्जी अपनी खुशी का इजहार कर रही हैं तथा खुशी के दो पल के गीत गा रही हैं, लेकिन चाहे जो हो उनकी आधार को रद्द करवाने की योजना व साजिशें बेकार हो चुकी हैं। आज सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से यह साफ कर दिया है कि आधार को वास्तव में किन कामों के लिए उपयोग किया जा सकता है। आधार को वास्तव में व्यवस्था के अंतर्गत नियमित प्रक्रिया में लाना एक लम्बा काम है इस लिये आदलत ने छात्रों व बच्चों को अभी राहत दे दी है। एडमिशन के समय व परीक्षा हाल में वैसे भी छात्रों से आधार की मांग करना कुछ अधिक ही हो रहा था जिसे अदालत ने काफी संतुलित कर दिया है। मान लीजिये यदि कोई छात्र आधार ले जाना भूल गया तो क्या वह परीक्षा हाल से वापस लौटता इसलिये छात्रों को राहत दी गयी है।
मोबाइल फोन व सिम लेने के दौरान आधार के माध्यम से भी हेर-फेर नहीं रुक पा रही थी लेकिन यहां पर भी आधार व्यवस्था को अवश्य लागू होना चाहिए था कि इस शर्त के साथ कि छह माह में सभी कंपनियां दर्ज सूचनाओं को डिलीट करें। इसके बाद किसी भी प्रकार की निजता का उल्लंघन नहीं होता और सिम कार्ड को लेकर अफरा-तफरी का माहौेल जो बना रहता था वह समाप्त हो जाता। अभी इस पर एक बार फिर आगे चलकर बहस अवश्य होनी है। आधार से लालफीताशाही और भ्रष्टाचार पर लगाम लग रहा है तथा गरीबों को सब्सिडी का लाभ भी मिल रहा हैं सबसे बड़ी बात यह हो रही है कि आधार से सरकारी पेंशन योजनाओं का लाभ लाभार्थियों को सीधे प्राप्त हो रहा है। गरीब सामथ्र्यवान बन रहे हैं।
आधार से राष्ट्रहित पूरी तरह से सुरक्षित हैे तथा सरकार सुरक्षा कारणों से किसी का भी डेटा मांग सकती है लेकिन उसे भी केवल छह माह तक के लिए ही रख सकती है। कोर्ट ने यह भी साफ कह दिया है कि घुसपैठियों के आधार नहीं बनने चाहिए। बड़े-बड़े लोग तथ दबंग जो गरीबों का अनाज चोरी कर लेते थे तथा उनको बेवकूफ बनाकर उनके लाभ को हड़प कर जाते थे उसमें लगाम लगी है। आधार के माध्यम से ही लाखों राशन कार्र्डों का फर्जीवाड़ा खुला है तथा फर्जी शिक्षकों, छात्रवृत्ति घोटालों का खुलासा लगातार हो रहा है।
वित मंत्री अरूण जेटली का कहना सही है कि कांग्रेस व यूपीए की सरकार जानती ही नहीं थी कि आधार का कैसे इस्तेमाल हो। इस फैसले से यह तय हो गया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का भी कहना है कि आज कांग्रेस उसी प्रकार से खुशी मना रही है जिस प्रकार से वह 2014 की पराजय को भी अपनी जीत मानती है।
आधार पर वास्तव में सबसे बड़ा आघात विपक्ष को लगा है उसकी योजना थी आधार को पूरी तरह से रद्द करवाने की जो निष्फल हो चुकी है। अदालत से लेकर मीडिया तक आधार के खिलाफ साजिशों का खेल उसी तरह से रचा गया जिस प्रकार से नोटबंदी व जीएसटी के खिलाफ कांगे्र्रस ने काम किया। यह योजना वास्तव में कांग्रेस पार्टी की ही थी, लेकिन वह इसे ठीक से लागू ही नहीं करवा पा रही थी। इसे मोदी सरकार ने सही ढंग से लागू किया व अब सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित कर दिया है, जिसका लाभ सरकार व जनता दोनों को ही मिलता दिखाई देगा।
मृत्युंजय दीक्षित