समुद्र नीला क्यों है

गोलू स्कूल से घर लौटते ही दादाजी के कमरे की ओर दौड़ा। दादाजी… दादाजी… आपसे एक बहुत ही जरूरी सवाल पूछना है। हाँफते हुए बोला। ठीक है भाई पूछ लेना पर पहले थोड़ी देर आराम तो कर लो, अपनी स्कूल की ड्रेस तो बदल लो। फिर एक नहीं दस सवाल पूछ लेना। गोलू अपनी स्कूल की ड्रेस बदल कर वापस दादाजी के कमरे की ओर दौड़ा। हाँ भाई गोलू अब बताओ तुम्हारा क्या सवाल था जिसके लिए तुम इतने उतावले हो रहे थे। गोलू ने झट से पूछा – ‘दादाजी समुद्र नीला क्यों है?’ अरे, गोलू आज अचानक ये सवाल तुम्हारे मस्तिष्क में कैसे आया? वो दादाजी आज विज्ञान की टीचर ने सभी बच्चों को इस सवाल का जवाब ढूंढ़कर लाने को कहा है। अच्छा, तो यह बात है। ठीक है तुम्हें इसका जवाब बताता हूं।
लेकिन, उससे पहले तुम्हें महान वैज्ञानिक सर सी. वी. रमन के बारे में कुछ जानकारी है भी कि नहीं? वो तो नहीं है दादाजी? बेटा आज जिस तरह तुम्हारे मन में विज्ञान की टीचर के कहने के बाद यह जिज्ञासा जगी कि आखिर समुद्र नीला क्यों है? उसी प्रकार सर सी. वी. रमन यानी चन्द्रशेखर वेंकटरमन भी जब तुम्हारी उम्र के थे तब उनके मन में स्वतः ही यह जिज्ञासा उत्पन्न हुई थी। तुम्हें पता है सर सी. वी. रमन बचपन से ही मेधावी थे। उनका जन्म 7 नवम्बर 1888 को दक्षिण भारत के तमिलनाडु के तिरूचिरापल्ली में हुआ था। उनकी विज्ञान के प्रति बढ़ती जिज्ञासा और पढ़ाई में विलक्षणता को देखते हुए उनके सर ने उन्हें कॉलेज की प्रयोगशाला में प्रयोग करने की पूरी छूट दे दी थी। जहां उन्होंने प्रकाश विवर्तन पर पहला शोध पूरा किया, जो लंदन की फिलसोफिकल पत्रिका में प्रकाशित हुआ। जब वे 1921 में इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय कांग्रेस में भाग लेकर जलयान के माध्यम से स्वदेश लौट रहे थे तब समुद्र के पानी को नीला देखकर उनके मन में बचपन का सवाल फिर से उभरा- ‘समुद्र नीला क्यों है?’
इसलिए उन्होंने अपनी खोज और भी तेज की और आखिर एक दिन इसका पता लगा ही लिया। जिसे आज ‘रमन प्रभाव’ के नाम से जाना जाता है। दादाजी, अब ये ‘रमन प्रभाव’ क्या है? गोलू ने एक बार फिर सवाल करते हुए पूछा। बेटा, जब सूरज की किरणें समुद्र पर पड़ती हैं तब रोशनी के सातों रंगों में से पानी के अणु नीली रोशनी बिखेरते हैं। इसी से ही समुद्र नीला दिखता है। लेकिन, दादाजी कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि समुद्र का नीला रंग आकाश की परछाई के कारण दिखता है। क्या ये भी सही है? नहीं… बेटा, ये बात सही नहीं है यदि ऐसा होता तो समुद्र के भीतर का पानी नीला कैसे दिखता।
दादाजी और भी रमन सर के बारे में बताइये ना? बिलकुल बेटा ! प्रकाश के क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट कार्य के लिए सर सी.वी. रमन को वर्ष 1930 में नोबेल पुरस्कार दिया गया था। इसलिए उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई होने का गौरव भी प्राप्त है। उनकी खोज के दिन 28 फरवरी को पूरे देश में ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ मनाया जाता है। दादाजी 28 फरवरी तो परसों ही है। हाँ, बेटा परसों ‘विज्ञान दिवस’ है और मैं चाहता हूं कि ये सारी बातें तुम अपने स्कूल में विज्ञान दिवस पर आयोजित होने वाली भाषण प्रतियोगिता में भाग लेकर सभी को बतायो। जी, दादाजी ! मैं आपकी सारे बातें अपने भाषण के माध्यम से सबको बताऊंगा। तभी गोलू को उसके दोस्त बंटी ने खेलने के लिए आवाज दी और गोलू थैंक यू दादाजी लव यू कहते अपना बल्ला लेकर खेलने के लिए चला गया।

परिचय - देवेन्द्रराज सुथार

देवेन्द्रराज सुथार , अध्ययन -कला संकाय में द्वितीय वर्ष, रचनाएं - विभिन्न हिन्दी पत्र-पि़त्रकाओं में प्रकाशित। पता - गांधी चौक, आतमणावास, बागरा, जिला-जालोर, राजस्थान। पिन कोड - 343025 मोबाईल नंबर - 8101777196 ईमेल - devendrasuthar196@gmail.com