ग़ज़ल

रूठे हुए दिल को मनाना भी जरूरी है।
दिल से दोस्ती निभाना भी जरूरी है।
यूँ तो जिंदगी में गम, निराशा, आसूँ बहुत,
नमी आँखों की, दर्द छुपाना भी जरूरी है।
वैसे तक़लीफ़, दुख-दर्द तो है बहुत लेकिन,
खुश रहने को हँसना-हँसाना भी जरूरी है।
बेसबब दिल पर कोई बोझ न हो बस,
जिंदगी में जंग को मिटाना भी जरूरी है।
तनावग्रस्त जिंदगी करें भी तो क्या करें,
अपनों को परेशानी बताना भी जरूरी है।
कभी भी कोई अपशब्द बुल जाये तो,
गलती पर सिर झुकाना भी जरूरी है।
मन को शांत रखने के लिए “सुमन”
हमें मंदिर मज़ारे जाना भी जरूरी है।
सुमन अग्रवाल “सागरिका”

परिचय - सुमन अग्रवाल "सागरिका"

पिता का नाम :- श्री रामजी लाल सिंघल माता का नाम :- श्रीमती उर्मिला देवी शिक्षा :-बी. ए. ग्रेजुएशन व्यवसाय :- हाउस वाइफ प्रकाशित रचनाएँ :- अनेक पत्र- पत्रिकाओं में निरन्तर प्रकाशित। सम्मान :- गीतकार साहित्यिक मंच द्वारा श्रेष्ठ ग़ज़लकार उपाधि से सम्मानित, प्रभा मेरी कलम द्वारा लेखन प्रतियोगिता में उपविजेता, ताज लिटरेचर द्वारा लेखन प्रतियोगिता में तृतीय स्थान, साहित्य सुषमा काव्य स्पंदन द्वारा लेखन प्रतियोगिता में तृतीय स्थान, काव्य सागर द्वारा लेखन प्रतियोगिता में श्रेष्ठ कहानीकार, साहित्य संगम संस्थान द्वारा श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान, सहित्यपिडिया द्वारा लेखन प्रतियोगिता में प्रशस्ति पत्र से सम्मानित। आगरा