कविता

अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय

कारगिल युद्ध के महानायकों में से एक परमवीर चक्र प्राप्त “कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय” को समर्पित कविता

“यदि फर्ज की राह में आड़े
मृत्यु भी आएगी
वचन है मेरा , मेरे हाथों
वह मारी जाएगी ”

ऐसे उद्गार जगाने वाले
अमर वीर सेनानी
परमवीर कैप्टन मनोज की
सुनिए आज कहानी

सीतापुर में जन्म हुआ था
लखनऊ में पढ़ाई
गोरखा एकादश रेजीमेंट में
पहली नियुक्ति पाई

एक बार वो गश्त पे निकले
हो गई काफी देर
लौटने पर साहब ने पूछा
कहां रहे मेरे शेर

बोले चिन्हित परिक्षेत्र में
मिले न आतंकवादी
तो उन दुष्टों के मिलने तक
हमने खोज बढा दी

भारतभूमि के गद्दारों को
धूल चटा आया हूं
केसर घाटी के सीने से कुछ
बोझ हटा आया हूं

ऐसे थे निर्भिक देशभक्त
कैप्टन पांडे मनोज
नस नस में उत्साह परम औ’
मुख तेजस्वी ओज

सन निन्यानबे तीन जुलाई को
इक संदेशा आया
खालूबर हिल से दुश्मन को
फ़ौरन जाए भगाया

शत्रु दुर्गम चोटी पर था
स्थिति बड़ी विकराल
किन्तु कर स्वीकार चुनौती
बढ़े हिन्द के लाल

रात के अंधेरे में व्युह बद्ध
शुरू हुआ आरोहण
शत्रु को भनक लगने से पहले
चोटी पर थी पलटन

फिर भारतपुत्रों ने घोष कर
दुश्मन को ललकारा
खालूबल चोटी पर गुंजा
भारत का जयकारा

कैप्टन मनोज की अगुवाई में
टूट पड़ी तब लश्कर
उल्टे पांव घुसपैठीये भागे
खाली करके बंकर

एक एक कर चारों बंकर
पर अधिकार जमाया
बड़े शान से पुन: तिरंगा
चोटी पर लहराया

लहू से लथपथ समरवीर तब
गर्वित गिरा भुमि पर
परमधाम को चला राष्ट्र को
अन्तिम वंदन देकर

जब तक अंबर पर सूरज है
सागर में है पानी
तब तक भारत में गूंजेगी
वीरवर तेरी कहानी

हिमालय का गौरव है जो
भारतभाल का चंदन
परशुराम के सत् वंशज को
कोटि-कोटि वंदन

— समर नाथ मिश्र
रायपुर

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