जम्मू-कश्मीर पर कांग्रेस की घातक और विकृत राजनीति

जब से जम्मू-कश्मीर राज्य का पुर्नगठन करते हुए धारा 370 और 35ए को हटाया गया है और फिर वहां के राज्य सचिवालय से राज्य के झंडे को उतारकर केवल भारतीय तिरंगा फहराया गया है तथा अब जम्मू कश्मीर में तीव्रता के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्र सरकार की 85 योजनाओं को भी पूरे राज्य में तीव्रता के साथ लागू किया जाने वाला है तब से जैसे पाकिस्तान हाय-हाय चिल्ला रहा है और परमाणु बम की धमकी दे रहा है, ठीक उसी प्रकार की हरकतें देश का विपक्ष गांधी परिवार के नेतृत्व में कर रहा है। कश्मीर घाटी में अलगावादियों, पत्थरबाजों तथा पाकिस्तानी असामाजिक तत्वों से लडाई के लिए एवं राज्य की जनता को सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने के लिए प्रशासन की ओर से जो प्रतिबंध लगाये जा रहे हैं वह राहुल गांधी व उनकी कंपनी को पसंद नहीं आ रहे हैं। वह इसलिए क्योंकि अब जम्मू कश्मीर में इन लोगों की राजशाही और कठमुल्लापन वाली राजनीति का अंत हो गया है। अब घाटी से अब्दुल्ला परिवार, महबूबा मुफ्ती तथा गुलाम नबी आजाद की राजनीति का अंत होने जा रहा है।
जब जम्मू कश्मीर को लेकर संसद में जोरदार बहस हो रही थी तब यदि कांग्रेस के लोग सरकार का साथ देते तो पाकिस्तान की कोई हैसियत नहीं थी कि वह कश्मीर मामले का अंतरराष्ट्रीयकरण करने का प्रयास करता और भारत पर परमाणु हमले की सीधी धमकी देता। आज कांग्रेस व राहुल गांधी की शह पर ही पाकिस्तान व अलगाववादियों की हिम्मत बढ़ी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कुटिल राजनीति से पाकिस्तान को वैश्विक मंचों से पूरी तरह अलग-थलग करने में सफलता हासिल की है। केवल चीन ही एक ऐसा देश है जो भारत के साथ चल रहे कुछ सीमा विवादों और पाकिस्तान में अपनी कुछ आर्थिक परियोजनाओं की मजबूरी के चलते उसके साथ खड़ा दिखायी पड़ रहा है।
लेकिन भारत की आंतरिक राजनीति के दृष्टिकोण से कांग्रेस व उसके सहयोगी दल भी पाकिस्तान के साथ खड़े दिखायी पड़ रहे हैं। जम्मू कश्मीर से धारा 370 का हटना और वहां पर राजनैतिक पर्यटन के माध्यम से अपने खतरनाक राजनैतिक मंसूबों की पूर्ति के लिए ही कृष्ण जन्माष्टमी के महापर्व के अवसर पर हिंदुओं व राष्ट्रवादी विचारधारा की शक्तियों का भी अपमान करने के लिए तथा देश में वहां से आने के बाद इन लोगों ने झूठ का मायाजाल फैलाने के लिए ही यह दौरा रचा था। राहुल गांधी को यदि कश्मीर की इतनी ही चिंता सता रही थी तो उन्हें सबसे पहले जम्मू और फिर लद्दाख तथा अमरनाथ यात्रा पर जाकर शिवलिंग के दर्शन करने चाहिए थे। लेकिन राहुल गांधी एंड कंपनी का तो यह तय शैतानी एजेंडा जो पाकिस्तानी मीडिया में खूब चर्चा का विषय बन रहा था। राहुल गांधी व उनके परिवार तथा तथाकथित राजनैतिक मित्रों को अब यह अच्छी तिरह से समझ लेना चाहिए कि यह न्यू इंडिया की नयी पालिसी और नयी राजनीति है। अब इस देश की सत्ता के गलियारे में केवल उन्हीं लोगों की पहुंच होगी जो राष्ट्रवाद की धवलधार में बहना चाहेंगे।
जम्मू कश्मीर कोई स्टंट नहीं है, यह स्टंट की राजनीति नहीं है। राहुल गांधी व उनके दोस्तों ने जिस प्रकार से अपने विमान मेें एक फर्जी कश्मीरी महिला को बैठाकर उनसे कश्मीर के हालात को जानने का प्रयास किया और अपने कुछ तथाकथित मीडिया मित्रों के माध्यम से उसे पूरी मीडिया में घुमाया यह उनका पूरा रचा रचाया फर्जी माइंड गेम और इसी बहाने मीडिया में किसी न किसी प्रकार छाने का प्लान था। जब इन लोगों को एयरपोर्ट पर रोका गया था तब भी इन लोगों ने तथाकथित मीडिया कर्मियों से मारपीट कर माहौल को खराब करने का असफल प्रयास किया था। कश्मीर के पर्यटन के लिए जाने वाले लोग टीवी पर जोर-जोर से बार-बार यही बयान दे रहे थे कि हम सभी बहुत देशभक्त और जिम्मेदार नागरिक व नेता हैं। जबकि उनकी सच्चाई कुछ और ही थी। अगर राहुल गांधी को कश्मीर पर इतनी ही चिंता थी कि तो उन्होंने अपने अब तक के राजनैतिक जीवन में कभी भी कश्मीरी पंडितों पर चिंता व्यक्त नहीं की और न ही उन पर अपनी चिड़िया उड़ायी। यह लोग कभी भी कश्मीर की वास्तविक चिंता नहीं की। यह सभी लोग घोर कट्टरवादी मुस्लिम परस्त राजनीति कर रहे हैं। इन सभी की मानसिकता बहुत अधिक विकृत व घातक हो चुकी है।
ये वही लोग हैं जिनकी सरकारें कभी हुर्रियत और अलगावादियों के खिलाफ राज्य मेें शांति बहाली के नाम पर ढोंग किया करती थीं और वार्ता की मेज पर जाने के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला करके जाती थीं। राहुल गांधी स्वयं कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में पूरी तरह से अलग-थलग हो चुके हैं। बहिन प्रियंका तो और भी अधिक बकवास कर रही हैं उनका भी दर्द समझ में आता है उनके पति राबर्टª वाड्रा भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे हैं तथा जेल जाने का खतरा गहरा गया है। मन में धैर्य नहीं रह गया है। यह वही राजनैतिक मित्रगण हैं जिन्होंने कभी नोटबंदी और जीएसटी का पुरजोर विरोध किया और देश में हिंसा भड़काने की पूरी साजिश की थी तब यह लोग सफल नहीं हो पाये थे। अब वही लोग कश्मीर पर उतर आये हैं। इन बेहद पुरानी हो चुकी राजनैतिक विचारधारा के लोगों को कश्मीर में वापस आ रही शांति और विकास की जो नयी सुंगध उठी है, वह भी पसंद नहीं आ रही है। असल में यह सभी नेता नहीं चाहते कि भारत शांति के पथ पर आगे बढ़े और देश का हर कोना विकास के नये मापदंडों को छुए। यह लोग हर समय लगातार बेनकाब होते जा रहे है।
इस अवसर पर बसपा नेत्री मायावती ने सरकार के पक्ष में जो बयान दिया है वह स्वागत योग्य है । कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चैधरी भी बहुत अधीर होकर बयानबाजी कर रहे हैं। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने ऐसे लोगों को दो टूक जवाब दे दिया है। राज्यपाल महोदय ने स्पष्ट कर दिया है कि अधीर रंजन ने संसद में जो बयान दिया है उसके बाद कांग्रेस की पूरे दश मेें कब्र खुद चुकी है। साथ ही यह भी उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी हालत में राज्य को राजनैतिक पर्यटन का हिस्सा नहीं बनने देंगे।
— मृत्युंजय दीक्षित