कविता

पेट भरता है….

नेताओं के भाषण से नहीं

राशन से ही पेट भरता है.

राशन जुटाने में आम आदमी का दम निकलता है.

आज के नेताओं का अजीबोगरीब अंदाज अखरता है.

सत्ता मिलते ही वह जनता की खामियां निरखता है.

पानी तब सिर से भी ऊपर चला जाता है.

जब वोट लेने वाला नेता वोटरों के ऐब गिनाता है.

जरूरी मसायलों पर वो नहीं देता तनिक ध्यान.

गैरजरूरी मुद्दों को लेकर करता है लंबे लंबे ऐलान.

ये हालात अपने देश में तब तक बने रहेंगे.

जब तक आम लोग नेताओं से सवाल नहीं करेंगे

— उमेश शुक्ल

परिचय - उमेश शुक्ल

उमेश शुक्ल पिछले 34 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। वे अमर उजाला, डीएलए और हरिभूूमि हिंदी दैनिक में भी अहम पदों पर काम कर चुके हैं। वर्तमान में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय,झांसी के जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान में बतौर शिक्षक कार्यरत हैं। वे नियमित रूप से ब्लाग लेखन का काम भी करते हैं।

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