कविता

वो और मैं..

वो कोमल फूल के जैसी है,
मैं निम्म तेज सा orna हूं,
वो सबको बहुत लुभाती है,
मैं बस घायल हो जाता हूं …

वो जंगल की इक मैना है,
मैं पिंजरे वाला तोता हूं,
वो खुले विचारों वाली है,
मैंने किया हुआ समझौता हूं …

वो रात पूर्णिमा वाली है,
मैं दिन का घोर उजाला हूं,
वो शीतल रात सुहानी है,
मैं तपता हुआ हूं …

वो मीठी वाणी कोयल की,
मैं मूक ध्वनि का राजा हूं,
वो तान बांसुरी हो,
मैं बिना स्वर का कामा हूं …

वो कल कल बहती नदियां है,
मैं उसका एक किनारा हूं,
उसकी मंजिल सागर है,
मैं उसकी एक सहारा हूं …

— नीलाश मालवीय “नीलकंठ” 

परिचय - नीलेश मालवीय "नीलकंठ"

पता - चीचली, नरसिंहपुर, (म.प्र.) पिन कोड - 487770 जन्म तिथि-- 25/01/1999

Leave a Reply