गीतिका/ग़ज़ल

उलझनें कम नहीं जिंदगी की

उलझनें कम नहीं जिंदगी की
बस बहुत हुआ अब इसे घटाओ ना,

थक जाएं जो कभी हारकर
तुम आकर गले लगाओ ना,

एक रूह, दो जिस्म में जिंदा रहे
इस कदर धड़कनों में समाओ ना,

मांग लो जान हमसे खुशी है हमें
लगकर गले से मुझमें समाओ ना,

छोड़ दें मुस्कुराना एकबार कहो,
आजमाना हो तो आजमाओ ना।
…….#कविता

परिचय - कविता सिंह

पति - श्री योगेश सिंह माता - श्रीमति कलावती सिंह पिता - श्री शैलेन्द्र सिंह जन्मतिथि - 2 जुलाई शिक्षा - एम. ए. हिंदी एवं राजनीति विज्ञान, बी. एड. व्यवसाय - डायरेक्टर ( समीक्षा कोचिंग) अभिरूचि - शिक्षण, लेखन एव समाज सेवा संयोजन - बनारसिया mail id : samikshacoaching@gmail.com

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