गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अगर पास हक़ की क़माई नहीं है
अभी प्यास तुमने बुझाई नहीं है

ये सोचा ख़ुदा से उसे छीन लाऊँ
मगर ऐसी तक़दीर पाई नहीं है

जहाँ पर फ़क़त राज़ शैतां का होगा
जहाँ में सुकूँ मेरे भाई नहीं है

घटा ग़म की बरसी मेरे दिल में ही बस
घटा ग़म की अम्बर पे छाई नहीं है

क़लम से दिया अम्न सारे जगत को
क़लम से तबाही मचाई नहीं है

— बलजीत सिंह बेनाम

परिचय - बलजीत बेनाम

सम्प्रति:संगीत अध्यापक उपलब्धियाँ:विविध मुशायरों व सभा संगोष्ठियों में काव्य पाठ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित आकाशवाणी हिसार और रोहतक से काव्य पाठ सम्पर्क सूत्र:103/19 पुरानी कचहरी कॉलोनी हाँसी:125033 मोबाईल:999626610

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