गीत/नवगीत

ख्वाहिशों के अल्फाज़ (गीत)

अल्फाज़ ख्वाहिशों के हैं ये; आरज़ू के साज़,
एहसास गुनगुना रहे नग़्मे ; जो सुर्ख़ आज।

सोचा था रखें दिल में ही; चाहतों के राज़,
चेहरा जो था ख़याल में; वो रूबरू है आज,
आँखें करें सवाल ये; हक़ीक़त है या ख़्वाब ?
रूह का तेरी रूह से मेरी; नाता जुड़ा है आज।
अल्फाज़ ख्वाहिशों के……….

मंज़िल तुम ही हो मेरी; साया भी राह का,
महताब शब के हो तुम्ही; सुबह के आफ़ताब,
सजदा किया है सर झुका; ख़ुदा बने हो आज,
मुक़द्दर को मेरे हो रहा; ख़ुद अपने पर ही नाज़।
अल्फाज़ ख्वाहिशों के……….

ताज़गी गुलों सी है; शोख़ी भी शबनमी,
मासूम मुहब्बतों के; रंग हैं ये मख़मली,
महका सा है बहका भी; बे-नज़ीर ये शबाब,
क्या नाम मैं दूं तुम्हें; तुम तो हो लाजवाब।
अल्फाज़ ख्वाहिशों के…….

परिचय - मधु शर्मा कटिहा

नाम - मधु कटिहा शैक्षणिक योग्यता – दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी व लाइब्रेरी साइंस में एमए। रूसी भाषा में सर्टिफिकेट। कार्य- स्वतंत्र लेखन प्रकाशन- सरिता, गृहशोभा, मुक्ता, नारी शोभा सहित विभिन्न प्रिंटेड पत्र-पत्रिकाओं, ई-मैगज़ीन्स तथा वेबसाइट्स पर रचनाओं का प्रकाशन। प्रकाशित पुस्तक- वर्तमान सृजन (सामूहिक) पुरस्कार – 1- कहानी, दिल्ली प्रैस के नारायणी पुरस्कार 2019 से पुरस्कृत। 2- राष्ट्रीय स्तर की अन्य प्रतियोगिताओं में निबंध व कहानी पुरस्कृत। ईमेल - madhukatiha@gmail.com

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