कुण्डली/छंद

कुण्डली

शरद सुहानी सी लगे, मनहर अरु गुलजार ।
शशि को करके शुभ विदा, रवि जी झांके पार।
रवि जी झांके पार, रोशनी बढ़ती जाय ।
दिन जैसे जैसे चढ़े, ठंढक मिटती जाय।
जा तू पावस मास, कि तेरी खत्म कहानी।
कर ले तू आराम, कि आई शरद सुहानी।

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