लघुकथा

लघुकथा – शराब अच्छी या बुरी?

             चतुरमल को वर्षों बाद संतान सुख प्राप्त हुआ, वो भी जुड़वां बेटों के रूप में। उन्होंने एक शानदार कॉकटेल पार्टी का आयोजन किया। मांस, मदिरा से दस फीट दूर रहने वाले आलोक को भी मजबूरीवश शामिल होना पड़ा, चतुरमल से घनिष्ठ व्यापारिक सम्बंधों के चलते। पार्टी में पहुंचकर चारों तरफ नज़र दौड़ाई। एक परिचित पहलवान के सामने की खाली कुर्सी देखकर वहां जा बैठा। वेटर के आने पर एक थम्स अप्, भुनी मूंगफली और दो सिंधी मसाला पापड़ का ओर्डर दिया। पहलवान ने अचरज भरी नज़रों से आलोक को देखकर कहा, ” मेरी तरह मुफ़्त की व्हिस्की पीने और मांसाहार खाने के बदले ये क्या घास – फूस और मीठे पानी का ओर्डर दिया है। ”
” हमारा परिवार शाकाहारी है। हमारी पीढ़ियों में वर्षों से किसी ने शराब को छुआ तक नहीं है। ” आलोक ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। थोड़ी देर बाद जब पहलवान को शराब चढ़ गई तो आलोक से फिर पूछा, ” अच्छा ये बताओ, शराब पीना अच्छी बात है या बुरी ? ” पहलवान द्वारा अचानक दागा गया सवाल सुनकर आलोक सकपका गया। खुद को कोसने लगा कि इस पहलवान के सामने बैठने की बेवकूफ़ी क्यों की ? खैर, जवाब तो देना ही था। ” मेरे जवाब से पहलवान असंतुष्ट हुए और मुझे यहीं चारों खाने चित्त  कर दिया तो ? ” यही सोचकर वो कांप उठा। मन ही मन में सारे देवी – देवताओं का स्मरण करने लगा। प्रभु से प्रार्थना करने लगा कि ऐसी सद्‌बुद्धि दे, जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। आखिरकार थोड़ा सोचकर, हिम्मत जुटाते हुए कहा, ” जो पिए उसके लिए अच्छी, जो न पिए उसके लिए बुरी बात है। ” आलोक का जवाब सुनकर पहलवान के चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट फैलने लगी। आलोक ने संतोष की सांस ली। उसे वो कहावत याद आयी, ” जान बची लाखों पाए …। ”
— अशोक वाधवाणी 

परिचय - अशोक वाधवाणी

पेशे से कारोबारी। शौकिया लेखन। लेखन की शुरूआत दैनिक ' नवभारत ‘ , मुंबई ( २००७ ) से। एक आलेख और कई लघुकथाएं प्रकाशित। दैनिक ‘ नवभारत टाइम्स ‘, मुंबई में दो व्यंग्य प्रकाशित। त्रैमासिक पत्रिका ‘ कथाबिंब ‘, मुंबई में दो लघुकथाएं प्रकाशित। दैनिक ‘ आज का आनंद ‘ , पुणे ( महाराष्ट्र ) और ‘ गर्दभराग ‘ ( उज्जैन, म. प्र. ) में कई व्यंग, तुकबंदी, पैरोड़ी प्रकाशित। दैनिक ‘ नवज्योति ‘ ( जयपुर, राजस्थान ) में दो लघुकथाएं प्रकाशित। दैनिक ‘ भास्कर ‘ के ‘ अहा! ज़िंदगी ‘ परिशिष्ट में संस्मरण और ‘ मधुरिमा ‘ में एक लघुकथा प्रकाशित। मासिक ‘ शुभ तारिका ‘, अम्बाला छावनी ( हरियाणा ) में व्यंग कहानी प्रकाशित। कोल्हापुर, महाराष्ट्र से प्रकाशित ‘ लोकमत समाचार ‘ में २००९ से २०१४ तक विभिन्न विधाओं में नियमित लेखन। मासिक ‘ सत्य की मशाल ‘, ( भोपाल, म. प्र. ) में चार लघुकथाएं प्रकाशित। जोधपुर, जयपुर, रायपुर, जबलपुर, नागपुर, दिल्ली शहरों से सिंधी समुदाय द्वारा प्रकाशित हिंदी पत्र – पत्रिकाओं में सतत लेखन। पता- ओम इमिटेशन ज्युलरी, सुरभि बार के सामने, निकट सिटी बस स्टैंड, पो : गांधी नगर – ४१६११९, जि : कोल्हापुर, महाराष्ट्र, मो : ९४२१२१६२८८, ईमेल ashok.wadhwani57@gmail.com

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