ब्लॉग/परिचर्चा

कीर्तिमानों के शिखर पर – लीला तिवानी जी

सभी को सादर अभिवादन ! एक बार फिर एक विशेष दिन के रूप में 10 सितम्बर ने दस्तक दी है। हम सबके जीवन में कुछ विशेष दिन कुदरत ने स्वयं निर्धारित किये होते हैं।  जीवन में घटित विशेष घटनाओं की याद स्वरूप हम इन्हें निर्बाध स्मरण करते रहते हैं और बना लेते हैं इस दिन को अपनी जिंदगी का विशेष दिन ! कुछ ऐसा ही वाकया है आज के दिन का यानी 10 सितंबर का !

आज ही के दिन 1946 में तब के अखंड भारत और अब पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में हमारी श्रद्धेय बहनजी लीला तिवानी जी का आगमन इस धरा पर हुआ था।  सुप्रसिद्ध लेखिका, कवयित्री और शिक्षा को समर्पित हमारी, आपकी और सभी पाठकों की आदरणीय श्रद्धेय बहनजी श्रीमती लीला लखमीचंद तिवानीजी किसी परिचय की मोहताज नहीं।

आज आपका जन्मदिन है । आज आपके इस गरिमामय और बेहद कामयाब जीवन प्रवास के 75 साल पूर्ण होने की ख़ुशी में हम सभी पाठक, लेखक, कामेंटेटर तथा शुभचिंतक आपके व आपके परिजनों की ख़ुशी में सहभागी हैं । हम सभी की तरफ से आपको जन्मदिवस की कोटिशः शुभकामनाएं ! ईश्वर प्रदत्त खुशी के इस पावन मौके पर ईश्वर से प्रार्थना है कि वह आपका वरदहस्त सदैव हम नव रचनाकारों के सिर पर बनाये रखे। आप सदैव स्वस्थ व प्रसन्न रहें तथा अपनी सकारात्मक रचनाओं से समाज में व्याप्त नकारात्मकता को हटाकर उत्साहपूर्वक उम्मीद का दीपक जलाती रहें , दुःखी व निराश जनों का पथ प्रदर्शन करती रहें ! जन्मदिवस की पुनः पुनः बधाई व शुभकामनाएँ श्रद्धेय बहनजी !

एक उम्दा रचनाकार होने के साथ ही आप पाठकों को भी रचनाकार बनाने की अद्भुत क्षमता रखती हैं। आदरणीय गुरमैल भामरा जी इसके सबसे बड़े व सशक्त प्रमाण हैं । उनकी इस सफलता के पीछे बेशक आदरणीय भाईसाहब की काबिलियत का बड़ा हाथ है लेकिन उनकी इस छिपी हुई प्रतिभा को पहचानकर उसे तराश कर उचित स्थान दिलाने के पीछे सिर्फ और सिर्फ आपका ही हाथ है । आदरणीय गुरमैल जी भाईसाहब हमेशा एक बात कहते हैं आपके बारे में ‘ आप वो पारस पत्थर हो जो लोहे को सोना बनाने की सामर्थ्य रखता है ‘ मैं उनके इस कथन से शतप्रतिशत सहमत हूँ ! आपने इस कथन की सत्यता को अपने कार्यों से प्रमाणित किया है।

लेखन में आपके सकारात्मक रवैये पर आपके मिलनसार व सर्वसमावेशी स्वभाव का भरपूर असर साफ परिलक्षित होता है ।
अपने संपर्क में आये हुए लोगों के हर सुख दुख में सहभागी होकर सबको अपना बनाने की आपकी बेजोड़ कुशलता से कौन अपरिचित है ?

आप अपने संपर्क में जो कोई भी हो उससे गहरे जुड़कर उसकी खुशी में शामिल होकर अपने समृद्ध शब्द भंडार से चुने हुए शब्द रूपी मोतियों से अलंकृत शब्दमाला अर्थात ब्लॉग का अनमोल व अनुपम उपहार उसे देना नहीं भूलती हैं। किसी अजनबी को भी अपना बना लेने व सदैव अपना बनाये रखने का आपका यह विशेष गुर अनुकरणीय है।

मानवीयता से ओतप्रोत सद्भाव , स्नेह , ममता व कर्तव्य परायणता आपको विरासत में ही मिला है जिसे आप अपने कर्मयोगी स्वभाव से बड़ी अच्छी तरह संभालते हुए उसका अपनी अनुपम रचनाओं द्वारा प्रचार व प्रसार के लिए सदैव ही प्रयासरत रहती हैं। आपकी सकारात्मक रचनाएं समाज में एक नई दिशा , उत्साह व नवचैतन्य की वाहक होती हैं।

इन सब जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए बहनजी अपनी पारिवारिक ,व सामाजिक ज़िम्मेदारियों का भी निर्वहन भली भांति करती हैं। एक आदर्श लेखिका के साथ ही आप आज भी एक अप्रतिम शिक्षिका हैं। आपके शिक्षण शैली के मुरीद आपके सभी छात्र अपने आपको सौभाग्यशाली समझते होंगे जिन्हें आप जैसा शिक्षक मिला हो आपकी प्रोत्साहित करनेवाली प्रतिक्रियाएं आपके छात्रों में वो चाहे आपके विद्यार्थी रहे हों अथवा नवोदित रचनाकार एक नवचैतन्य का निर्माण कर देती हैं। प्रोत्साहन से एक जादू सा हो जाता है। इसके बारे में आप ही के शब्दों में ”एक शिक्षिका होने के कारण मैं प्रोत्साहन के जादू से भलीभांति परिचित हूं. इसी प्रोत्साहन के बल पर मेरे अनेक छात्र-छात्राएं अपने व्यवसाय के साथ-साथ जाने-माने लेखक व कलाकार बन सके हैं. बस किसी के खास हुनर को पहचानकर थोड़ा-सा प्रोत्साहन और बड़ा-सा परिणाम, यही है ”प्रोत्साहन का जादू।” कितना सटीक व सार्थक है आपका अनुमान इस प्रोत्साहन के जादू के बारे में यह आपके प्रोत्साहन से उपजे नवोदित लेखकों की उत्कृष्टता को देखकर पता चलता है। मेरे लेखन का तो अस्तित्व ही आपके प्रोत्साहन से है। आज अपना ब्लॉग पर आपके सान्निध्य में आदरणीय सुदर्शन जी , चंचल जैन जी , जीवन चमोली जी, कुसुम सुराणा जी व आदरणीय इंद्रेश उनियाल जी जैसी शख्सियतों से आपका अपना ब्लॉग सदैव ही शोभायमान रहता है। अच्छा लगता है व मन गर्वित हो जाता है आपकी रचनाओं को सबसे अधिक लोकप्रिय रचनाओं की सूची में पाकर। यह आपकी ऊर्जा व साहित्य के प्रति समर्पण का ही नतीजा है कि प्रतिष्ठित अखबार नवभारत टाइम्स के अपना ब्लॉग में आपके ब्लॉग्स की संख्या 29 शतक लगा चुकी है और आपकी लेखन यात्रा अनवरत जारी है। ईश्वर से प्रार्थना है आपकी लेखनी इसी तरह अनवरत चलती रहे व आपके पाठकों, शिष्यों व प्रशंसकों को आपकी अद्भुत रचनाओं का आस्वादन करने का मौका सतत मिलता रहे। साहित्य से आपका लगाव कितना गहरा है यह आज भी आपकी सक्रियता से पता चलता है।  आपके शब्द तो किसी को भी आपका मुरीद बनाए बिना नहीं रह सकते जिनमें सच्चाई है, गहराई है व जीवन के प्रति एक सकारात्मक नजरिया है। आपके शब्द हैं ‘” मैं एक शिक्षिका के रूप में बेशक रिटायर हो गई हूँ, मगर मैं एक विद्यार्थी की रूप में कभी रिटायर नहीं हो सकती. बहरहाल जो आधार मैंने अपने विद्यार्थियों के लिए अपनाया उसे एक अलग रूप में अपना ब्लॉग के साथियों के साथ अपनाती हूँ. मैं हर नवोदित लेखक को प्रोत्साहित करती हूँ बिना किसी कामना के, जो मेरे ब्लॉग्स के सफर में साथ चल रहे हैं, आपने उन सभी के नाम भी देख लिए होंगे, उनके साथ मैं भी उतनी ही उत्साहित होकर चल रही हूँ.”  काश ! ऐसे विचार हर वरिष्ठ रचनाकार के होते तो हमारा हिंदी साहित्य आज और समृद्ध होता, अतुलनीय होता।

उनके अपनत्व व प्रोत्साहन के जादू का ही असर है कि उनके हम जैसे शिष्य बड़ी बेसब्री से इस विशेष दिन का इंतजार करते रहते हैं व उनकी खुशियों में शामिल होकर स्वयं को खुशकिस्मत समझते हैं।

जीवन की आपाधापी और कुछ जिम्मेदारियाँ मुझे अब इतना समय नहीं देती कि मैं अब अपना ब्लॉग पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकूँ, जिसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ। फिर भी मेरा प्रयास रहता है समय मिलते ही बहनजी के ब्लॉग्स पढ़ने का, अक्सर पढ़ता भी हूँ लेकिन समयाभाव की वजह से कुछ लिख नहीं पाता। अप्रैल के अंतिम सप्ताह के बाद जब बहनजी के ब्लॉग्स अचानक आने बंद हो गए तो चिंतित होना स्वाभाविक था और संपर्क करने का प्रयास किया। मई के प्रथम सप्ताह में अचानक आदरणीय विजय सिंघल जी का भी संदेश आ गया बहनजी के बारे में जानकारी प्राप्त करने की मंशा से। अब संपर्क करने का मेरा प्रयास और तेज हो गया लेकिन सफलता न मिलने से घोर निराशा हुई। ईश्वर से प्रार्थना रत रहा कि सब ठीक ही हो और फिर कुछ दिनों बाद आदरणीय गुरमैल भामरा जी के माध्यम से बहनजी की कुशलता की खबर से मन को शांति मिली।

कुछ दिनों बाद आपकी पुनः लेखन यात्रा शुरू देखकर मन को बेहद संतोष हुआ। ईश्वर आपको सदैव स्वस्थ रखें व आप दीर्घायु हों, यही प्रार्थना !

कीर्तिमानों के शिखर पर बहनजी के 2920 ब्लॉग्स होने के बाद अब इंतजार है शीघ्र ही इनके 30 वें शतक में बदलने का ! श्रद्धेय बहनजी को इस अनूठे व अजेय कीर्तिमान के लिए भी हार्दिक बधाई ! ब्लॉग्स के शताकों की तरह आप उम्र का भी शतक लगाएं व सुखी व स्वस्थ रहते हुए दीर्घायु हों ईश्वर से यही प्रार्थना !

आदरणीय बहनजी फेसबुक के कुछ साहित्यिक मंचों पर भी सक्रिय रहती हैं और नित नए सृजन अनवरत उनकी लेखनी से निर्झरित होते रहते हैं ।

लेखन की भूख उनकी निरंतर बढ़ती ही जा रही है । साहित्यिक मंचों पर आयोजित हर प्रतियोगिता में भाग लेना और बेहतरीन लेखन का प्रदर्शन करना उनकी साहित्यिक प्रतिबद्धता को ही तो दर्शाता है । ख्यातनाम साहित्यिक वेब पोर्टल जय विजय में भी आपका सक्रिय लेखन अनवरत जारी है ! यहाँ भी आप शीर्ष रचनाकारों के साथ विराजमान हैं । जय विजय मासिक पत्रिका में प्रति माह आपकी उपस्थिति एक अनोखा ही कीर्तिमान बनाती हैं। इसके लिए भी बधाई देते हुए एक बार पुनः आपको हृदय से जन्मदिवस की हार्दिक बधाइयां व शुभकामनाएं !

धन्यवाद !

(  श्रद्धेय आदरणीया बहनजी को उनके जन्मदिवस के सुअवसर पर कोटिशः शुभकामनाओं सहित समर्पित रचना ! )

6 thoughts on “कीर्तिमानों के शिखर पर – लीला तिवानी जी

  1. लीला दीदी के अमृत महोत्सव पर सादर प्रणाम🙏
    आप नाबाद शतायुजीवन पाएँ, यही पाथेय कामनाएँ है🙏

  2. आदरणीय राजकुमार भाई जी, सादर प्रणाम. आपने हमारे जन्मदिन पर इतना खूबसूरत लेख लिखा, हम अत्यंत भावाभिभूत हैं और समझ में नहीं आ रहा है, कि क्या लिखें. आपने हमारे बारे में बहुत कुछ लिख दिया है, यह आपकी जर्रानवाजी है. हम निःशब्द हैं. हम तो बस बहुत-बहुत अद्भुत लेख के लिए शुक्रिया और धन्यवाद ही कह सकते हैं. आपने कहां-कहां से प्रसंग उठाए हैं, कमाल है आपका भी! वैसे आप कमाल के तो हैं ही, उसमें कोई दो राय नहीं है. जन्म-दिवस की बार-बार अनगिनत शुभकामनाएं देते हुए आपने अत्यंत खूबसूरत स्वस्ति-वाचन किया है, बहुत-बहुत शुक्रिया.

  3. 75वें जन्मदिवस पर बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनायें बहिन जी! अपना आशीर्वाद बनाये रखें।

  4. राजकुमार भाई , पहले तो हम बहन जी को उन के जन्म दिन की वधाई देते हैं . दुसरे बहन जी बिलकुल पारस की तरह ही हैं . आज भी मुझे वोह दिन याद है जब अचानक उन के एक ब्लॉग पर नजर पढ़ी तो पढ़ कर मुझे लगा जैसे इस ब्लॉग का मुख्य किरदार मैं ही हूँ और मैंने एक बहुत बड़ा कॉमेंट लिख डाला .बस इस ब्लॉग ” आज का श्रवण कुमार ” से शुरू हुआ न जाने मैंने क्या क्या लिख डाला जो मैं जिंदगी में कभी सोच ही नहीं सकता था . उन से हुए इस सम्पर्क को आज सात वर्ष से ऊपर हो गए हैं और अभी तक यह जारी है . उन के ही माध्यम से आप से भी मुलाकात हो गयी . यह उन का जादू नहीं तो और क्या हो सकता है !

    1. विजय भाई, जन्मदिन पर हार्दिक बधाइयां और शुभ कामनाएं देने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया.

    2. आदरणीय गुरमैल भाई जी, सादर प्रणाम, जन्मदिन पर हार्दिक बधाइयां और शुभ कामनाएं देने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया. आपने बहुत कुछ लिख दिया और अपनी प्रतिभा का श्रेय हमें दे दिया. यह भी आपका आशीर्वाद ही है. आपमें प्रतिभा थी, मौका पाते ही चमक उठी. आपकी प्रतिभा का अंकुर आपकी लगन की खाद और परिश्रम के पानी से आज बहुत बड़ा पेड़ बन गया है. एक बार फिर जन्मदिन पर हार्दिक बधाइयां और शुभ कामनाएं देने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया. राजकुमार भाई को इतना सुंदर लेख लिखने के लिए बधाई.

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