गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

है देखता सभी कुछ,भगवान जिंदगी में
खोना नहीं कभी भी ईमान जिंदगी में
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राहों के कंटकों से डरना नहीं मुसाफिर
मिलते हैं रास्ते कब आसान जिंदगी में
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आशा का दीप मन में, हरदम जलाए रखना
आएंगी फिर बहारें, वीरान जिंदगी में
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मुश्किल घड़ी हो चाहे, गम की हो धूप फिर भी
अधरों पे हो हमेशा, मुस्कान जिंदगी में
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सीखा यही है हमनें अब तक जमाने भर से
लेना नहीं किसी का अहसान जिंदगी में
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क्या जाने इस जहां में कैसी हवा चली है
इंसान बन गया क्यूँ शैतान जिंदगी में
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हर मोड़ पर मिलेंगे, धोके, फरेब हमको
रहना कभी न खुद से, अंजान जिंदगी में
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मेहनत पे रख भरोसा, दुनिया की भीड़ में भी
बेशक रमा मिलेगी पहचान जिंदगी में