कहानी

इक इश्क़ तारी है

आकांक्षा पेंशन ऑफिस में अपने पापा के साथ पेंशन रिन्यूअल के लिए आई थी। पीछे मुड़कर देखा तो कुछ जाना पहचाना अनजान – सा चेहरा दिखा,साथ में कोई बुजुर्ग थीं ,शायद वो लोग भी पेंशन रिन्यूअल के काम से आए थे। ट्रेनिंग के वक़्त इंस्टीट्यूट में देखा था एकाध बार , शायद जूनियर है, पूछती […]

गीत/नवगीत

सहमा उपवन

सहमा उपवन छाया कुहास अलि मौन शांत बीता सुहास कलिओं के बीच सहमी तितली किसलिए पीर क्यों जग उदास आगंतुक न कोई आया न गया किसलिए शुष्क व्यवहार नया क्यों धरा ह्रदय रोया जर्जर क्यों निशा दिखे अति घोर निडर जगती का निर्बल भाल हुआ क्यों लगे सहस सब व्यर्थ प्रयास किसलिए पीर क्यों जग […]

लघुकथा

लव यू पापा

“पापा..प्लीज साइन कर दो न फॉर्म पर..” नीति लगभग रुआंसी सी बोली। “कहा न..विदेश से पढ़ाई की अनुमति नहीं दे सकता बेटा..जमाना देख रही हो न?” पापा की बात सुनकर नीति औंधे मुंह अपने पलंग पर लेट गई ।नीति की माँ ने पापा को बुलाकर धीमे से कहा “हर तरफ खतरा है तो क्या जीना […]

गीत/नवगीत

कश्मीर हमारा है

भारत माँ के मस्तक जगमग करता एक सितारा है, वो कश्मीर हमारा है।। बर्फ की चादर श्वेत ओढ़ कर हिमनग पहरा देते हैं वीर सिपाही शान तिरंगा घर-घर फहरा देते हैं शांत सहज डल झील में चलता फूलों सजा शिकारा है.. वो कश्मीर हमारा है।। हवा स्वयं को करने सुरभित आती केसर घाटी में चंदन […]

कविता

तेरी बेरुखी

_________ “”तू अपने ग़म से आज़िज है मैं तेरे ग़म से अफ़शुर्दा तू है मशग़ूल औरों में मैं तुझ बिन अश्क़ में गुम हूँ… तेरा जो सर्द लहज़ा है ये मेरी जान ले लेगा तेरे इक अत्फ़ की ख़ातिर आतिशे हुज़्न में गुम हूँ···· क्या है अस्बाब तेरी बेरूखी का किसको मालूम है हमें तो […]

कविता

तुम्हें खबर है न?

मेरी जिंदगी की किताब के हर वरक हर हरफ़ हर शिफ़हे पर तुम्हारी खामोश मौजूदगी मजबूत दरख़्त सा भरोसा मेरा तुम हो यहीं कहीं जिस्म तो दूर है पर रूहानी एहसास तुम्हारा हर लम्हा हर पल हर शिम़्त वहीं मुङा है उस पन्ने का कोना जहाँ छूटी थी हमारी अधूरी कहानी कैसा राब़्ता है ये […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

खिलौना जब बनाया दिल किसी ने किसी का तब रुलाया दिल किसी ने किसी ने प्यार की थपकी लगाई . . ज़फाकर के दुखाया दिल किसी ने सभी मतलब परस्ती दोगले हैँ ……………. नहीं दिल से मिलाया दिल किसी ने हमें महसूस ये क्यों हो रहा है . . नजर से है हटाया दिल किसी […]

लघुकथा

काश…

“लड़कियों की पढ़ाई पर ज्यादा खर्च नहीं करना चाहिए वरना इनके दिमाग फिर चूल्हे चौके को छोड़ हवा में उड़ने लगती हैँ..” अपने पड़ोसी मित्र प्रेम सहाय जी के यहाँ चाय का सिप लेते हुए नवीन बाबू ने कहा। मीता, प्रेम सहाय जी की बेटी जो अपने परा स्नातक के फार्म में अभिभावक के हस्ताक्षर […]

लघुकथा

लघुकथा : अॉड औऱ ईवन

“कौन आ गया सुबह सुबह?” द्वारकानाथ  जी  लाठी टेकते हुए दरवाजा खोलने गए और दरवाजा खुलते ही बच्चों की तरह खिलखिला उठे। दरवाजे के दूसरी तरफ उनके कॉलेज टाइम के सहपाठी मिथिलेश प्रसाद खङे थे। दोनों गले मिले। द्वारका जी ने आश्चर्य मिश्रित खुशी के साथ पूछा, “मिथिला तुम इस शहर में मुझसे मिलने आए हो? पता किसने […]

हास्य व्यंग्य

मुकरी

    सब दिन पीछे पीछे डोले कभि कुछ मांगे कभि कुछ बोले डांटूं तो रो जावे नाहक ए सखी साजन? ना सखी बालक।   तन से मेरे चुनर उङावे मेरे बालों को सहलावे इसका छूना लगता चोखा ए सखी साजन? ना सखी झौंका   इसके बिन अब चैन न पाऊं इसको खो दूं तो […]