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  • सहमा उपवन

    सहमा उपवन

    सहमा उपवन छाया कुहास अलि मौन शांत बीता सुहास कलिओं के बीच सहमी तितली किसलिए पीर क्यों जग उदास आगंतुक न कोई आया न गया किसलिए शुष्क व्यवहार नया क्यों धरा ह्रदय रोया जर्जर क्यों निशा...

  • लव यू पापा

    लव यू पापा

    “पापा..प्लीज साइन कर दो न फॉर्म पर..” नीति लगभग रुआंसी सी बोली। “कहा न..विदेश से पढ़ाई की अनुमति नहीं दे सकता बेटा..जमाना देख रही हो न?” पापा की बात सुनकर नीति औंधे मुंह अपने पलंग पर...

  • कश्मीर हमारा है

    कश्मीर हमारा है

    भारत माँ के मस्तक जगमग करता एक सितारा है, वो कश्मीर हमारा है।। बर्फ की चादर श्वेत ओढ़ कर हिमनग पहरा देते हैं वीर सिपाही शान तिरंगा घर-घर फहरा देते हैं शांत सहज डल झील में...

  • तेरी बेरुखी

    तेरी बेरुखी

    _________ “”तू अपने ग़म से आज़िज है मैं तेरे ग़म से अफ़शुर्दा तू है मशग़ूल औरों में मैं तुझ बिन अश्क़ में गुम हूँ… तेरा जो सर्द लहज़ा है ये मेरी जान ले लेगा तेरे इक...

  • तुम्हें खबर है न?

    तुम्हें खबर है न?

    मेरी जिंदगी की किताब के हर वरक हर हरफ़ हर शिफ़हे पर तुम्हारी खामोश मौजूदगी मजबूत दरख़्त सा भरोसा मेरा तुम हो यहीं कहीं जिस्म तो दूर है पर रूहानी एहसास तुम्हारा हर लम्हा हर पल...

  • गज़ल

    गज़ल

    खिलौना जब बनाया दिल किसी ने किसी का तब रुलाया दिल किसी ने किसी ने प्यार की थपकी लगाई . . ज़फाकर के दुखाया दिल किसी ने सभी मतलब परस्ती दोगले हैँ ……………. नहीं दिल से...

  • काश…

    काश…

    “लड़कियों की पढ़ाई पर ज्यादा खर्च नहीं करना चाहिए वरना इनके दिमाग फिर चूल्हे चौके को छोड़ हवा में उड़ने लगती हैँ..” अपने पड़ोसी मित्र प्रेम सहाय जी के यहाँ चाय का सिप लेते हुए नवीन...

  • लघुकथा : अॉड औऱ ईवन

    लघुकथा : अॉड औऱ ईवन

    “कौन आ गया सुबह सुबह?” द्वारकानाथ  जी  लाठी टेकते हुए दरवाजा खोलने गए और दरवाजा खुलते ही बच्चों की तरह खिलखिला उठे। दरवाजे के दूसरी तरफ उनके कॉलेज टाइम के सहपाठी मिथिलेश प्रसाद खङे थे। दोनों गले मिले।...

  • मुकरी

    मुकरी

        सब दिन पीछे पीछे डोले कभि कुछ मांगे कभि कुछ बोले डांटूं तो रो जावे नाहक ए सखी साजन? ना सखी बालक।   तन से मेरे चुनर उङावे मेरे बालों को सहलावे इसका छूना...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    जीवन – लीला रहे अधूरी सुख  – दुख के संयोग बिना प्रीति कहाँ हो पाती पूरी कुछ दिन विरह वियोग बिना खट्टे – मीठे सभी स्वाद से सजी गृहस्थी की थाली पार कहाँ लगती है नैया...