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  • इश्क़ का गाँव 

    इश्क़ का गाँव 

    बसाना चाहता हूँ डाकूओं की बस्ती से दूर इश्क़ का गाँव जहाँ हो प्रेम के पेड़ मोहब्बत की तितली और सर्द रातों में जलता रहे स्नेह का अलाव हाँ ! बसाना चाहता हूँ नफ़रत की नागफनियों...



  • कविता

    कविता

    मैं कविता नहीं लिखता मैं उपमा नहीं देता मैं शब्दों में सपने नहीं दिखाता मैं झूठी तारीफ़ के पुल नहीं बांधता हां,,,हां,,,,ये सच है खरा सच है मैं नहीं दूंगा तुम्हें कोई भी छलावा नहीं रखूंगा...



  • पागल औरत !

    पागल औरत !

    गांव के नुक्कड़ पर बैठी औरत जिसके बाल खुले हुए और कपड़े अस्त-व्यस्त है। उसकी ये दुर्दशा देखकर लगता है कई दिनों से वह भूखी है। उसके चेहरे पर गम की लकीरें स्पष्ट नजर आ रही...