गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मस्जिद दिखाई दे न शिवाला दिखाई दे । हर आदमी के दिल में उजाला दिखाई दे । चाहत का उसकी या खुदा कुछ ऐसा हो असर हर शिम्त मुझको चाहने वाला दिखाई दे । मुझको पुकार लेना बड़े नाज़ से सनम जब भी तुझे न कोई सहारा दिखाई दो। बर्बाद करके खुद को भी मिलती […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अब किसी से भी मुहब्बत नहीं कर पाउँगा । प्यार आता है , सियासत नहीं कर पाउँगा । जाने अनजाने में दिल टूट गया तेरा गर जिंदगी भर मैं नदामत नहीं कर पाउँगा । प्यार बस एक दफा तुमसे हुआ था मुझको अब किसी और से चाहत नहीं कर पाउँगा । इस कदर टूट गया […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दोस्ती यारी निभा कर चल दिए । बेवफा मुझको बता कर चल दिए । मुफलिसी का दौर भी अच्छा ही था दोस्त आये , आजमा कर चल दिए । जो मिरी कश्ती के खेवनहार थे बीच धारे में वो लाकर चल दिए । मानते थे जिनको अपनी जिंदगी बज्म में नजरें झुका कर चल दिए […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तू मेरे सहारे , मैं तेरे सहारे । न तुम थे हमारे, न हम थे तुम्हारे । सितम ढा के मुझको रुलाओ न जालिम क़ि बुझ जाते है आँसुओं से शरारे। समुन्दर की गहराई क्या उनको मालुम जो चलते है बच कर किनारे किनारे । जिन्हें पढ़ने लिखने को भेजा गया था वतन बाँटने  को […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

  दिल हमारा जलाना नहीं प्यार मेरा भुलाना नहीं नज़र से तुम गिराना नहीं आ गये हो तो जाना नहीं मुश्किलों से तुझे पालते बाप माँ को रुलाना नहीं यूं ही करता हूँ मैं शायरी मेरा दिल शायराना नहीं उस शहर का बसिन्दा हूँ मैं जिस जगह आबुदाना नहीं भूल जाना मुहब्बत भले खत को […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

  जमाने भर की अब सुनता नही मैं मुझे मालूम है, अच्छा नही मैं । बदल जाना नही फितरत हमारी तुम्हे मालूम है, तुझ सा नही मैं । मुझे क्यूँ चाहते हो हद से ज्यादा तेरी तकदीर में, लिक्खा नही मैं। समझता हूँ सियासत आजकल की भले दिखता हूँ, पर बच्चा नही मैं । मिरी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

  अभी अंदाज में रखनी है हमको सादगी थोड़ी। फकत है काम ज्यादा बच गई है जिंदगी थोड़ी । जमाने भर की दौलत साथ कब जाती है दुनिया से कजा आये मयस्सर हो मुझे बस सरजमीं थोड़ी । मुहब्बत को इबादत जानकर हमने किया हरदम सनम में आ गई है आजकल बस बेदिली थोड़ी । […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

  किसी अंजान से रिश्ता कभी गहरा नहीं होता । मुहब्बत गर न होती आदमी जिन्दा नहीं होता। कोई ऊँचा नहीं होता कोई नीचा नहीं होता । अगर इंसान ये समझे कोई भूखा नहीं होता । नहीं मशहूर होते लैला मजनूं हीर रांझा भी मुहब्बत पर जमाने का अगर पहरा नहीं होता । कमा ली […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

  भूख दुनियाँ से मिटा कर देखते हैं रोते बच्चों को हँसा कर देखते हैं भूल जाता हूँ जमाने भर के गम को जब हमें वो मुस्कुरा कर देखते हैं मन्दिरों में जा के हासिल कुछ न होगा नेकियाँ जग में लुटा कर देखते हैं तिश्नगी में जिंदगी करके बसर हम प्यास दरिया की मिटा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

  आता जाता नहीं कोई कभी बीराने में दिले बर्बाद छुपा रक्खा है तहखाने में । शौक से करता नहीं हूँ मयकशी मैं यारो उसकी तस्वीर नजर आती है पैमाने में । बेअदब हो के यूँ इठला के न चलिये साहिब बड़कपन आदमी का दिखता है झुक जाने में । क्यूँ भला दूर हुआ जिंदगी […]