कविता

कविता

यकीनन कारवां-ए-ज़िन्दगी जब गुज़र गया होगा तब हर तक़रीर को उलट- पुलट के पढ़ा गया होगा कि बोल उठे होंगे तब जज़्बात वह भी जिनका इल्म हमें भी न रहा होगा यकीनन कारवां-के-ज़िन्दगी जब गुज़र गया होगा तब हर नादानी से भरी ज़िन्दगी को संजीदगी से लिया होगा… हर लफ्ज़ जो कह गए थे हम […]