गीत/नवगीत

प्राणाधार

स्वार्थ  लोलुप मानव  देखो, कैसे तुमको हैं काट रहे। अपने ही पतन  को  देखो,  अब भी नहीं हैं भाँप रहे।। प्रदूषण के विकराल दानव,  तभी तो उनको हैं ग्रास रहे। सदियों ही से तुमने तो, उसको जीवन के उपहार दिए।। जाने कितने ही कवियों के, महाकाव्यों को आकार दिए। यमुनातट के कदम्ब हुए, कान्हा का […]

गीत/नवगीत

रूठ गए श्याम मेरे

रूठ गए श्याम मेरे, कैसे मैं मनाऊँगी? भई आधी रतिया है, मैं घर कैसे जाऊँगी? राधा नाहीं गोपी नाहीं, मीरा मैं बन जाऊंगी। विष का ये प्याला सखी, हँसके मैं पी जाऊँगी। रूठ गए श्याम मेरे… मोह माया संग, मम ऐसा उड़ा रे। भई तोसे दूर मैं तो, कैसे तुझे पाऊँगी? रूठ गए श्याम मेरे… […]

कविता

अनसुलझे

अनसुलझे प्रश्नों में उलझकर, इसकी उसकी जगह खड़े होकर, सोचना बड़ा ही अच्छा है । शायद! हृदय भी तुम्हारा, बहुत अच्छा है । लेकिन अपने ही आप में, अपना विश्वास ढूंढ लेना, सबसे अच्छा है। अनसुलझे रिश्तों में उलझकर, रेशम से धागे सुलझा लेना, बड़ा ही अच्छा है। शायद! इरादा भी तुम्हारा, बड़ा ही पक्का […]

कविता

रोजगार

“रोजगार” इक अंगार, जिसमें दिन-रात, मैं जलता हूँ। कभी खुली, तो कभी छिपी, बेरोजगारी में मैं पलता हूँ। “रोजगार” इक मंझधार, जिसमें न डूबा, औ न उतराना हूँ। कभी तंगी, तो कभी मंदी, के जंजाल में मैं फंसता हूँ। “रोजगार” इक उपचार, है हर समस्या का समाधान। परन्तु बेरोजगारी के इस दौर में, कभी ये […]

कविता

जीना ही है जो

जीना ही है जो, तो तू आग बन के जी। खुद को मार के, तू न यूँ ख़ाक बन के जी। देख के भी अन्याय, न तू यूँ, होठ सी के जी। लाशों को कहाँ कब? अन्याय दिखता है। उनसे तो धुआँ ही उठता है। जीना ही है जो, तो तू आग बन के जी। […]

कविता

तुम बिन

तेरे मेरे बीच जो, ह्रास की रेखा खींच गई, साथ ही साथ वर्जनाओं की, परिधी भी दिख गई। उसके बाहर पग, धरना वर्जित था, उस ओस से रिश्ते का, परिधी के परे, जीवित रहना भी, नामुमकिन था। भाव-चित्त-प्रेम ने स्थिर हो, नैनों की भाषा, नैनों ने समझी थी। शब्दों की अल्पता, उस सम्पूर्णता को, कब […]

कविता

संकल्प

डर कर नहीं, डट कर लड़ेंगे। अपनों के लिए ये जंग, हम हंसकर लड़ेंगे। समस्या नहीं, समाधान बनेंगे। महामारी का हम ही, निदान बनेंगे। अज्ञानवश कर बैठे, जो गलती, चीन-स्पेन-जर्मनी-इटली , हम हरगिज़ वो नहीं करेंगें। जनता कर्फ्यू है जनहित में, देशहित में हम इसे सफ़ल करेंगें। कर दे रौशन, जो आने वाले कल को, […]

कविता

बचाव

कोरोना वायरस को ना बनने दें अभिशाप, जागरूकता-स्वच्छता ही सर्वोपरी बचाव। साधारण मास्क और सैनिटाइजर से, इसके संक्रमण को रोकें, आत्मसात कर लें, विशेषज्ञों के दिए सुझाव। रहता नहीं हवा में ये, रहता ये सतह पे। जगह- जगह पहुँचे ये, वस्तु-जीव पे रह के। पड़े धातु पे तो बारह घण्टे, कपड़े पे नौ घण्टे, हाथों […]

कविता

कविता

यकीनन कारवां-ए-ज़िन्दगी जब गुज़र गया होगा तब हर तक़रीर को उलट- पुलट के पढ़ा गया होगा कि बोल उठे होंगे तब जज़्बात वह भी जिनका इल्म हमें भी न रहा होगा यकीनन कारवां-के-ज़िन्दगी जब गुज़र गया होगा तब हर नादानी से भरी ज़िन्दगी को संजीदगी से लिया होगा… हर लफ्ज़ जो कह गए थे हम […]