लघुकथा

आज के घर

“कार्यक्रम मेें मिलकर अच्छा लगा ।” उसने कहा,”ऐसे कार्यक्रम जल्दी-जल्दी होना चाहिए, ताकि हम सब मिल सकें ।वैसे तो कहाँ मिलना हो पाता है ?” किसी ने भी, किसी को भी, भूले से भी अपने घर आने का निमंत्रण नहीं दिया। आज के घर इंटीरियर डेकोरेशन के लिए हैं, इंसानों के लिए नहीं।

संस्मरण

अल्लाह और भगवान

कापी में से कागज़ के फाड़ने की आवाज़ सुन अध्यापिका चौंक गईं और चुपचाप मूक-बधिर छात्र के पीछे खड़ी होकर देखने लगीं कि वह इस कागज़ का क्या करेगा ! छात्र ने उस कागज़ पर किसी अन्य छात्र का नाम लिखा और कुछ ऐसा लिखा जो अच्छा न था। लपककर अध्यापिका ने कागज़ अपने कब्ज़े […]