कविता

काल का विध्वंस

काल का विध्वंस देख , बेचारों की लाचारी देख लाक डाउन के नाम पर जनता की सदाचारी देख घूम रहा है डण्डा पुलिस का हर सड़क हर डगर काम से जाते लोगों साथ निठल्लों की अगर मगर गुनहगारों साथ निर्दोष लोगों पर चलती यह आरी देख लाकडाउन के नाम पर जनता की सदाचारी देख क्यों […]

गीतिका/ग़ज़ल

बेटी सजाना रह गया

लाल जोड़े को पहन बेटी सजाना रह गया जब चली परदेश पिय छूटा घराना रह गया माथ  पर टीका गले में हार , नथनी नाक में कान में कुंडल सुशोभित सा हिलाना रह गया छोड़ रिश्ते दूसरे घर में विराजे लाड़ली लाड़ भाई का सदा को तब लड़ाना रह गया अम्ब का अवतार नारी वो […]

गीतिका/ग़ज़ल

चाह पाने की

चाह पाने की ख्याली जाएगी अब पली आशा निकाली जाएगी हो न पूरे स्वप्न सबके यहाँ बिन मनी सारी दिवाली जाएगी नोट अपने ही न मिलते बैंक से ब्याह निपटाने दलाली जाएगी दूसरे की रौनकें है बेटियाँ प्यार से ही ये संभाली जाएगी खौफ उनको अब किसी का भी न हो जब सही संस्कार डाली […]

गीतिका/ग़ज़ल

करो गर प्रार्थना

करो गर प्रार्थना क्यों जग तुम्हारा हो नहीं सकता इरादे नेक हो तो क्यों किनारा हो नही सकता दिये हो जख्म अपनों ने दुखाया हो कभी दिल तो कभी वो नर भरत का सा दुलारा हो नहीं सकता करे कोशिश अनेको जिन्दगी में गर हमेशा ही कभी भी शख्स ऐसा तब बिचारा हो नहीं सकता […]

गीतिका/ग़ज़ल

राधा बावली है

किशन को देख राधा बाबली है पड़ी उसकी नजर जो सांवली है चली आती सुनी जो बाँसुरी धुन बनी श्यामा उसी की लाड़ली है चढ़े कदम्ब चुरा कर के वसन जब सहे सब गोपियाँ ये धाँधली है गिरफ्तारी हुई है प्रेम में जब सभी की खोपड़ी अब ओखली है पकी है प्यार में कान्हा सखी […]

कविता

हम नन्हें तरूवर

हम नन्हें तरू है , हमसे है हरियाली मत काटो हमको , हमसे है हरियाली पादप काटोगे बढ़ जायेगी गर्मी हमको न जलाओ हमसे है हरियाली पी गये धरा का सब जल काट हमें तुम हमको न सताओ हमसे है हरियाली पाई पाई हिसाब अब देना होगा नित हमें लगाओ हमसे है हरियाली ताप को […]

गीतिका/ग़ज़ल

करतार किसके लिए

इक नया जन्म करतार किसके लिए रोज खेलते है किरदार किसके लिए हो गया है जहाँ आज इतना निडर कब उठा दे वो हथियार किसके लिए बैंक का कर्ज लेकर चले जो गये भागते है वो म्यामार किसके लिए दर्दं हर शख्स का दूर होये न तो क्यो बनी है ये सरकार किसके लिए आबरू […]

गीतिका/ग़ज़ल

साथ हर पल दिया पर निभा तू नहीं

साथ हर पल दिया पर निभा तू नहीं दर्द में बन चिरागे जला तू नही कोशिशें की कई मर्तबा रोज पर डाल सा नर्म होकर झुका तू नही आँधियाँ चल रही नफरतों की यहाँ प्रेम दिल में जगे वो खुदा तू नही बादलों ने सुनाया मधुर राग जब नेह की बारिशों में पिला तू नही […]

गीतिका/ग़ज़ल

स्थान न हो नफरतों के लिए

स्थान कोई न हो नफरतों के लिए एक सम दृष्टि हो मजहबों के लिए प्रेम पींगें बढ़ा कर मुहब्बत करो हाथ को भी बढा दोस्तों के लिए नेक इन्सान खुद में जगाए सदा कर उठे उस खुदा नेमतों के लिए सीख हर धर्म की यह हमेशा रही जान को भी गंवा आयतों के लिए कर्म […]