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  • विचारों की प्रकृति

    विचारों की प्रकृति

    🌼..विचारों की प्रकृति..🌼 अनंत रूपी प्रकृति जब अठखेलियां लेती हुई बलखाती हुई प्रत्यक्ष होती है, तो वैराग्य मन कवि निः स्वार्थ भाव से इन सब रूपों में अपने आप को सारगर्भित कर लेता है। वहीं स्वार्थपरक...

  • कविता – मानवता का अंत

    कविता – मानवता का अंत

    ये क्या हो रहा है आज मिला हमें कैसा यह ताज इंसानी पाश का खंडन कर जाती,धर्म,सम्प्रदाय में विखंडित कर तरुणियों की शुचिता का दमन किया हाय रे इंसान! फिर से तूने मानवता का अंत किया।...