लघुकथा

कल्याणकारी बाढ

आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी राघवेन्द्र ने मंत्री जी से कहा -“सर! हर साल बाढ आती है, हजारो लोग मारे जाते हैं, देश को अरबों -खरबों का नुकसान होता है, इसका कोई स्थायी निदान क्यों नही निकाला जाता? ” मंत्री महोदय राघवेंद्र जी को घूरते हुए-“हीं……..,तो है तुम्हारे पास कोई स्थायी निदान?” राघवेंद्र-“जी सर, ये […]

लघुकथा

टिफीन और डिनर

वही डेढ़-दो बज रहे होंगे।कबाड़ी के दुकान में काम कर रहा दुखना मालिक से बोला-“मालिक खाए खातिर 50₹ दे देते।” मालिक- “खाना…..! होटल में खाएगा! घर से टिफीन लेकर क्यों नहीं आया?” दुखना- “मालिक, कनिया के बोखार लागल रहै खाना नै बनैलकै।” मालिक-बहाना छोड़, आ ई बता कि एक टाईम 50₹ का खाएगा तो घर […]

लघुकथा

अपराध बोझ

एक के बाद एक प्रेस वाले रमेश बाबू के घर पहुंच रहे थे। पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल था। हो भी  क्यों न बिटिया स्टेट टॉप जो की थी। इतनी बड़ी एचिवमैंट के बाद भी, ना जाने क्यों, रमेशबाबू के चेहरे पर बनावटी मुस्कान झलक रही थी। अन्नपूर्णा से रहा नहीं गया और उसने […]

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लघुकथा  – गरीबी कर

एक  राजा था।उसे आभास हुआ कि एक कुएँ  में  कुछ लोगों  ने अवैध तरीके से गहने छुपा रखे है। उसने अचानक अपने  सिपहियों को कुआं खोदने का हुक्म दिया।खुदाई शुरू हुई और अन्ततः कुछ भी हासिल नही हुआ ।राजा को उस खुदाई में हुए खर्च तथा कुएँ को सुदृढ करने में होने वाले खर्च की […]

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लघुकथा – ईमानदारी

“पापा आज आपकी भी छुट्टी है और मेरी भी।आज तो खाने पे बाहर चलना हीं पड़ेगा।” गोलु जिद पर अड़ गया। रमेशबाबु समझाने लगे-“अच्छे बच्चे जिद नहीं करते।बाहर का खाना खाने से सेहत पर बुरा असर पड़ता हैं और तुम्हें तो बड़े होकर सैनिक बनना है न! तो सेहत का•••।” आगे कुछ बोल पाते इससे […]

लघुकथा

लघुकथा- सलाह

छोटी बिटिया के ससुराल में सब कुछ ठीक ठाक नहीं होने की वजह से चिंतित सिद्धेश्वर बाबू को उनके समधी (बड़ी बिटिया के ससुर)  रामधनी जी ने कहा- “समधी साहब! इतना मत सोंचिये, लड़का तो आपके पक्ष में है न! बस हो गया, भाँड़ में जाए उसका एमिली-फैमिली। तब से दिमाग खपाए जा रहे हैं, कौन […]