कविता

कविता : कृषक

क्यों न जाती सबकी राह तुम तक क्यों न आती तेरी आह हम तक सीचं सीचं कर धरती , जीवन तू जगाता है बोलो न कृषक तू फिर क्यों यम-दीप जलाता है माना आँखों पर सबके है कठोर तम छाया हुआ प्रकृति के मनमानी का तुझ पर बड़वानल आया हुआ रख हौसला तू अन्नदाता , […]

गीत/नवगीत

देखो ! बसंत ऋतू है आई I

लहराता है जब पीत-दल धरा जब ले अंगड़ाई पुलकित होते उपवन जब लेकर मानस की गहराई देखो ! बसंत ऋतू है आई I पिक का कुहू ध्वनि प्रेमियों का हित-वर्धन बना भ्रमर गीत कूजन कर प्रीत -जोग है लगाई देखो ! बसंत ऋतू है आई I पीत -पुष्प फूले वन वन राजहंस औ ” विकच […]

कविता

कविता : बीत गयी सुहानी बेला

बीत गयी सुहानी बेला क्या लिखूं क्या गाऊं छुट गया हर किनारा मुझसे इस जिदगी का, अब ठौर कहाँ मै पाऊँ न साथी न राह न मंजिल किस बात पे मै अब इतराऊँ बीत गयी सुहानी बेला क्या लिखूं क्या गाऊं फूल बगीचे कलियाँ हर दामन मे मै निर्झर कांटे पाऊँ फ़ैल रही है शीतल […]

कविता

कविता : बात करुँगी, बात करुँगी

हर पल वेदना सहती रहती थी, अब न रोकूंगी खुद को आली बात करुँगी , बात करुँगी , उनसे ह्रदय की बात कहूँगी सज संवर प्रिय का संताप हरूँगी बात करुँगी , बात करुँगी पुष्प चुनूगीं,नूतन वेश धरूंगीं खुद को भी अर्पण करूँगीं बात करुँगी , बात करुँगी मैं वागदत्ता तेरी प्रत्युत्पन्न तेरे चरणों में […]

कविता

कविता : बनारस की इन राहों में

बनारस की इन राहों में वेदना की विकल बाँहों में चल रहा मैं अनजान बेसहारा ग्रीष्म की दहकती दाह में जल रहा मैं एक गम का मारा बनारस की इन राहों में हर साँस बोझिल हो चली हर पल निकलता जा रहा मैं भटकता चल रहा लिए मन में झमेला आह ! एकदम अकेला बनारस […]