कविता

जा रही है गाँव झुनिया

जा रही अब गाँव झुनिया । एक गठरी शीश पर है, देह दुर्बल पाँव भारी, काँख मुन्ना को दबाए, एक उँगली थाम मुन्नी, साथ चलती जा रही है, पेट चूहे कूदते हैं, तैरते हैं प्रश्न कितने, व्योम उर वातावरण में । शाम सुबहो-दोपहर को, जिन घरों में माँज करके, नित्य बर्तन वो जुठीले, पालती परिवार […]

कुण्डली/छंद

त्रिभंगी छंद

घर से मत निकलो, सब जन प्रण लो, तालाबंदी सफल बने । थोड़ा गम खाओ, मत घबराओ, छँट जाएँगे मेह घने । अपने कर धोना, दूर करोना, निकट न आवे राय सही । बाहर मत जाना, कसम उठाना, ध्यान रहे जो बात कही ।। फैली बीमारी, दुनिया सारी, रात-दिवस अब जूझ रही । जो नहीं […]

गीत/नवगीत

नवगीत

नेता तो जब-जब आते हैं। कमजोर सताये जाते हैं॥ रूखा-सूखा जो भी पाएँ, खाकर अपनी भूख मिटाएं, करवट ले रात बिताते हैं, नेता तो जब-जब आते हैं। कमजोर सताये जाते हैं॥ मोटा-झोँटा पहना करते, महलों की अभिलाष न करते, छोटी झोपड़ी बनाते हैं, नेता तो जब-जब आते हैं। कमजोर सताये जाते हैं॥ शहर बड़े अपने […]

गीत/नवगीत

अभिज्ञान-पत्र

श्रद्धा सुमन चढ़ाऊँ कैसे,कोई सूझे युक्ति नहीं। जब तक दुश्मन जिंदा फिरते,तब तक होनी मुक्ति नहीं। सैनिक जान गँवा देते हैं,स्वप्न सुरक्षा के बुनते। नहीं उठाते ठोस कदम क्यों,निंदा-निंदा बस सुनते। नहीं भुजाएँ अब तक फड़कीं,लगता पानी खून हुआ। दुबक गया साहस कोने में,या रोड़ा कानून हुआ। संविधान को बदलो अथवा,धाराएँ बलिदान करो। बहुत हुआ, […]

गीत/नवगीत

गीत

घुस पाक सरहद में गए थे शेर हिन्दुस्तान के। कर स्वप्न चकनाचूर आए नीच पकिस्तान के।। जो फन उठाए नाग उसका फन कुचलना चाहिए। हर वक्त छाती पर नहीं यूँ मूँग दलना चाहिए। है सार गीता का यही पावन वचन भगवान के। घुस पाक सरहद में गए थे शेर हिन्दुस्तान के।। आतंकवादी भेजता लेकिन नहीं […]

मुक्तक/दोहा

चतुष्पदी

भूल शहादत जाए वीरों की दो दिन में, घोटालों पर नियमित चर्चाएँ होती हैं। आँख दबाना न्यूज सुनो जी ब्रेकिंग हुई, ध्यान कहाँ जाता जब बेचारी रोती हैं। — पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’  

कुण्डली/छंद

घनाक्षरी छंद

मन में विश्वास लिए करते प्रयास रहें, मुख न मलिन करें स्वाद चखें जीत का। जीत का जुनून चढ़े और सूझे कुछ नहीं, मानो बंद रच रहा गीतकार गीत का। गीत का सृजन करे मन चाही धुन बजे, जब कोई नित पाए संग मनमीत का। संग मनमीत का जो सुखद हमेशा रहे, जान कोई नहीं […]

पुस्तक समीक्षा

खोज और प्राप्ति : एक नायाब रत्न (पुस्तक समीक्षा)

  साहित्य समाज को दिग्भ्रम से बचकर एक नई दिशा में अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान करता है।गद्य और पद्य काव्य के माध्यम हैं।संस्कृत वाङ्गमय में पद्य की अपेक्षा गद्य को श्रेष्ठ मान्यता दी गई है।आचार्य दण्डी का कथन है-‘गद्यं कवीनां निकषं वदन्ति’।इससे यह स्पष्ट है कि गद्य ही विद्वानों की राय में कवियों का […]

कुण्डली/छंद

कुंडलियाँ छंद

अपना भारत देश जो,लगे सुरक्षित आज। हर पल सेवारत् रहें,दृढ़ता से जांबाज। दृढ़ता से जांबाज,रहें जल-थल-अंबर में। तब जाकर सुख-चैन,प्राप्त करते हम घर में। कहता ‘कवि विकलांग’,यही मेरा है सपना। रहे सदा खुशहाल,देश में सैनिक अपना।। पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’

कुण्डली/छंद

मुक्तहरा

जिसे तुम देख रहे विकलांग उसे मत मान कभी कमजोर। करे यदि कोशिश ला सकता वह जीवन में कल नूतन भोर। रचे नित ही इतिहास यहाँ पर थाम चले कर जो श्रम डोर। सदा वह मंजिल प्राप्त करे अपनी तम हो कितना घनघोर।। पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’