सामाजिक

हर अपराध की दोषी स्त्री ही क्यों?

 यह तथ्य अत्यंत विचारणीय है ,कि हमारे समाज में आज भी स्त्री और पुरुष के मध्य भेदभाव किया जाता है। पितृसत्तात्मक समाज की सोच में रत्ती भर बदलाव नहीं आया है।यहाँ  यदि बालक कोई अच्छा कार्य करता है, तो उसका श्रेय पिता को दिया जाता है, और यदि दुर्भाग्यवश कोई बालक कुसंगति में पड़कर गलत […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मात्र मूर्ति उपासना से ईश्वर प्रसन्न नहीं होते

आज के युग में प्रायः यह देखा जा रहा है, कि पढ़े-लिखे परिवारों में भी धार्मिक कर्मकांडों जैसे -मूर्ति पूजा , व्रत,साधना, जागरण आदि पर विशेष बल दिया जा रहा है।चाहे व्यक्ति के अंतर्मन में कितनी भी मलिनता हो किंतु वह  मनके की माला हाथ में थाम कर स्वयं को संत की भाँति प्रदर्शित करना […]

स्वास्थ्य

मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ – कारण एवं रोकथाम के उपाय

क्या है मानसिक स्वास्थ्य–  आधुनिक युग की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य अत्यधिक प्रभावित होता है। ‘अवसाद’ मानसिक रोग का सबसे साधारण प्रकार है, जिसे अंग्रेजी में ‘डिप्रेशन’ कहा जाता है। इसमें व्यक्ति को भूलने की बीमारी हो जाती है। हम सभी के लिए सभी बातों को याद रखना काफी मुश्किल होता है। रोजमर्रा […]

गीतिका/ग़ज़ल

चाँदनी रात

दिलकश-दिलफ़रेब है चाँदनी रात,  दूध से नहाई है मौसम ए हयात। तुम चुप रहो, हम भी रहें ख़ामोश , आँखों की आँखों से होती रहे बात।  मन मदहोश करती है मदमस्त हवा,  इत्र में डूब  सी गई है  सारी कायनात। चाँद की चाँदनी चुपके से चुन लो मोतियों से सजी है तारों की बारात। धड़कन […]

सामाजिक

वर्जिनिटी टेस्ट हेतु आखिर महिलाएँ ही क्यों?

वर्जिनिटी टेस्ट आधुनिक युग में बहुतायत में प्रयुक्त होने वाला शब्द है। इस शब्द का हिंदी रूपांतरण “कौमार्य परीक्षण” होता है। वर्जिन शब्द का प्रयोग प्रायः एक लड़की की पवित्रता और उसके कौमार्य व्रत का पालन करने के आँकलन हेतु किया जाता है। आज हमारे समाज में जब लड़कियाँ लड़कों से कदम से कदम मिलाकर चल […]

इतिहास

लकड़ी बीनने से ओलंपिक तक का सफ़र

आज हम एक ऐसी महिला खिलाड़ी के जीवन की कहानी सुना रहे हैं, जिन्होंने टोकियो ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग में भारत को सिल्वर मेडल दिलवाया। इस अद्भुद खिलाड़ी का नाम है मीराबाई चानू। मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 में मणिपुर के एक छोटे से गाँव में हुआ था। उनका गाँव मणिपुर की राजधानी इंफाल […]

सामाजिक

शिकायत है मुझे

मुझे शिकायत है आज की आधुनिक उस पीढ़ी से जो अपने संस्कारों, मूल्यों,नैतिक दायित्व का निर्वहन करने में असमर्थ हो रही है। आज हम सभी व्यस्त जीवनचर्या का पालन करते हैं।हमारे पास बुजुर्गों के पास समय व्यतीत करने के लिए समय ही नहीं है। गणवेश के साथ साथ हमारी आत्मा भी पाश्चात्य संस्कृति के रंग […]

सामाजिक

जीते जी करें माँ-बाप की सेवा : न करें मृत्यु भोज पर बाहरी दिखावा

आधुनिक युग में व्यक्ति भौतिकवादी विचारों का शिकार हो चुका है, आज हम अपने माँ-बाप की सेवा उनके जीते जी नहीं करते हैं। और उनकी मृत्यु के बाद मृत्यु भोज का बड़ा आयोजन करते हैं। मेरा मानना है कि हमें जीते जी ही अपने माँ-बाप को वह सब सुख- सुविधाएं, मान -सम्मान, देखभाल और समय […]

पुस्तक समीक्षा

विभिन्न भावों से अलंकृत रचनाओ का समावेश – “लम्हो की खामोशियाँ”

‘लम्हों की खामोशियाँ’ शाहाना परवीन का प्रथम काव्य संग्रह है । शाहाना जी को बचपन से ही साहित्य में विशेष रूचि थी ।उनके पिताजी सदैव ही उनके लिए प्रेरणा स्रोत रहे। जो अब इस दुनिया में नहीं है। किंतु अपने विचारों और व्यक्तित्व की छाप और प्रभाव शाहाना जी पर छोड़ गए हैं ।शाहाना जी […]

गीत/नवगीत

सीमा का सिपाही

युद्ध अरि से लड़ने जाऊँ, सीमा का सिपाही बनकर, तन मन न्यौछावर कर जाऊँ, सीमा का सिपाही बनकर। एकता के यज्ञ में प्राणों की आहुति देकर, अपने उर में देश रक्षा का दृढ़ संकल्प लेकर, देशभक्त मैं कहलाऊँ, सीमा का सिपाही बनकर। मात्र भूमि पर बलिहारी तन मन, राष्ट्रगीत से करूँ भारत माँ का वंदन, […]