पुस्तक समीक्षा

विभिन्न भावों से अलंकृत रचनाओ का समावेश – “लम्हो की खामोशियाँ”

‘लम्हों की खामोशियाँ’ शाहाना परवीन का प्रथम काव्य संग्रह है । शाहाना जी को बचपन से ही साहित्य में विशेष रूचि थी ।उनके पिताजी सदैव ही उनके लिए प्रेरणा स्रोत रहे। जो अब इस दुनिया में नहीं है। किंतु अपने विचारों और व्यक्तित्व की छाप और प्रभाव शाहाना जी पर छोड़ गए हैं ।शाहाना जी […]

गीत/नवगीत

सीमा का सिपाही

युद्ध अरि से लड़ने जाऊँ, सीमा का सिपाही बनकर, तन मन न्यौछावर कर जाऊँ, सीमा का सिपाही बनकर। एकता के यज्ञ में प्राणों की आहुति देकर, अपने उर में देश रक्षा का दृढ़ संकल्प लेकर, देशभक्त मैं कहलाऊँ, सीमा का सिपाही बनकर। मात्र भूमि पर बलिहारी तन मन, राष्ट्रगीत से करूँ भारत माँ का वंदन, […]

कविता

आख़िर कब तक यूँही

आखिर कब तक यूँ ही कोरोना का दंश सहेंगे? आखिर कब तक निज गृह में क़ैद रहेंगे। नीरव हो चुके हैं हॉल, मॉल और विद्यालय, क्षुब्ध हो गया है मन,और मन का आलय, आखिर कब तक मास्क के पीछे छुपते रहेंगे? आखिर कब तक यूँ ही कोरोना का दंश सहेंगे? कब मित्रमंडली में मौज मस्ती […]