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  • कविता — बुतसाज

    कविता — बुतसाज

    वो बुतसाज मेरे नज़दीक आया मुझे लगा…. अब वो मुझ मे से मुझे तराशेगा…. “आह! कितना सुंदर पत्थर !” मेरे सीने पर भारी बूट के साथ अपना दाहिना पैर रखते वो चहका और सिगरेट सुलगा बाएं...

  • कविता – बादशाह का डर

    कविता – बादशाह का डर

    वो रोज़ ही मुझे देख मुस्कुराता,उछलता हाथ चूमता और फिर आगोश मे ले लेता क्योकि वो मेरे रूह और जिस्म के बेहद करीबी है… आज वो मुझे देख न मुस्कुराया न उछला बस अकबकाया और दौड़...

  • एहसास के दरीचे से…

    एहसास के दरीचे से…

    खूबसूरत सा वो जाफ़रानी गोला धरा को चूम जैसे ही विदा लेने आता है वृक्षों के झुंड तले टिमटिमाने लगते हैं नटखट से जुगनूं ढलती हुई शाम की रूपहली किरणें रात के आँचल में सितारे टाँकने...

  • कविता

    कविता

    बहुत मोहतबर और सूझवानों की महफिल से आई थी बहुत कुछ सुना विचारशील तर्कशील तर्कयोग्य मेरे तर्को को भी तो सराहा गया खुश थी सुधिजनों की संगत कर परन्तु रात मुझे यह स्वप्न क्यों कर आया...

  • वनवास

    वनवास

    हमारी किस्मत ने अभी कुछ समय और वनवास भोगना है संघर्षशील इतिहास जो लिखना है झूठे प्रीतिभोज के परोसे थाल मे से भूखे पेट की अग्न को और थपथपाना है अभी सब्र संतोष का पहाड़ा पढ़...

  • कविता

    कविता

    धरती अपनी धूरी पर चक्कर लगाती है किसी को कोई एतराज नही होता धरती सूरज के इर्द गिर्द चक्कर लगाती है किसी को खबर तक नही होती परन्तु…. जब मेरे पेट की भूख नाभी की परिक्रमा...

  • क्षणिका

    क्षणिका

    साँपों की कूँज में आँखो की मूँद में पत्तों मे से गुजरती हूँ बनकर हवा खिड़की तो खोलो मेरा नाम तो बोलो छुपी नही कही मै वहॉ भी हूँ..!! — रितु शर्मा परिचय - रितु शर्मानाम...

  • कविता : आजादी

    कविता : आजादी

    मै जब अपनी आजादी की चर्चा करती हूँ तो मै सरहदों पर लगी कांटेदार तार को सरकते या टूटते नहीं देखती न ही ग्लोब पर उकेरी लकीरों को गडमड होते देखती हूँ मेरी आजादी हथियारों के...

  • बाल कविता : गिलहरी

    बाल कविता : गिलहरी

    एक गिलहरी पेड़ पे बैठी टुकुर टुकुर कुछ देखे पूँछ उठाकर गिल्लो रानी धीरे धीरे उतरे इधर देखे,उधर देखे उतरे और रूक जाए फिर कुछ उतरे,देखे और थम जाए उखड़ी सांस और लगे थकी सी संभल...

  • लफ्ज

    लफ्ज

    मुझे नही आता हुनर सीपीयों से मोती ढूढने का मजहबों से लहू और लहू से महक ढूढने का मै तो मन की गुफा से मुहब्बतों के रंग ढूढती हूँ ज़जबातों से लिपटा दर्द और उम्मींदो के...