गीतिका/ग़ज़ल

कुछ कर सकते नहीं तो, मर जाते क्यूँ नहीं 

जो आग सीने में है ,जहाँ में लगाते क्यूँ नहीं कुछ कर सकते नहीं तो, मर जाते क्यूँ नहीं बहुत शोर किया करते हैं जुल्मों-सितम का ज़िन्दा आप भी है, कुछ कर जाते क्यूँ नहीं दरिया बन कर बहते रहे हैं खुले मैदानों में हिम्मत से समन्दर में उतर जाते क्यूँ नहीं किसे क्या हासिल […]

गीतिका/ग़ज़ल

छल-कपट का पाशा फेंकते रहिए

जब तक देख सकते हैं, देखते रहिए दूसरे की आग पर रोटी सेकते रहिए बाज़ी किसकी होगी ,किसको पता है पर छल-कपट का पाशा फेंकते रहिए अपनी -अपनी छतें और ऊँची कर लें जितना हो सके,आसमाँ छेकते रहिए सारा किस्सा है इश्तहारों का जनाब खुद को दूसरों से ज्यादा आँकते रहिए सच की तलब किसको […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – बहार लेके चलते हैं

जब वो चले तो अदाओं में बहार लेके चलते हैं कभी गुलमोहर तो कभी गुलनार लेके चलते हैं जिधर देखें उधर वो ही नज़र आए हैं दफ़अतन वो अपने जिस्म में क्या खुमार लेके चलते हैं होंठों पर लाली, आँखों में काजल, चेहरे पर हया वो अपनी तासीर में कितने अंगार लेके चलते हैं उसे […]

संस्मरण

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

आज जब पूरा भारत बेरोज़गारी की मार झेल रहा है और लगभग हर सरकारी नौकरी किसी न किसी वजह से कटघरे में खड़ी है तो हर युवक जो इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है कहीं न कहीं यह जरूर सोचता है कि कोई ऐसा फॉर्मूला मिल जाए जिस से परीक्षा एक बार में ही […]

गीतिका/ग़ज़ल

मेरा दिल मानो कि गुलाब सा खिल गया

मेरा दिल मानो कि गुलाब सा खिल गया कमरे में जब तेरा खत पुराना मिल गया खाली रातें,सूने दिन और बेचैन सी साँसें तेरी यादें पा कर एक ज़माना मिल गया वही कहीं तुम्हारे लबों की छुअन भी थी छुआ तो मेरे होंठों को तराना मिल गया हर्फों में छिपे तेरे घुँघराले लटों का जादू […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – जो मेरे गुनाहों पर पर्दा डाल देता है

वो कौन है जो मेरे गुनाहों पर पर्दा डाल देता है और मेरे गुनहगार होने का डर निकाल देता है बताओ, कैसे आदतें ये अपनी काबू में आएँगीं वो तो रोज़ कोई नया सिक्का उछाल देता है मैं कोशिश में हूँ कि कोई तो मीनार बच जाए हवा जब चले तेज़ तो हाथ में वो […]

गीतिका/ग़ज़ल

ज़मीर में सलामत  मुआमला रखिए 

हर रिश्ते में थोड़ा फासला रखिए अभी से ही सही ये फैसला रखिए दूरियाँ खलेंगी लेकिन खिलेंगी भी अपने अहसासों पर हौसला रखिए हर कोई तो ख़ुशी का कायल नहीं हर घडी कोई नया मसअला रखिए सीख जाएँगें दिल बहलाने का हुनर हर मौसम में ही नया जुमला रखिए तय हो जाएँगी ऐसे हर कठिन […]

गीतिका/ग़ज़ल

तुम क्या थे मेरे लिए, अब मेरी समझ में आता है

तुम क्या थे मेरे लिए,अब मेरी समझ में आता है बादल छत पर मेरे , बिना बारिश गुजर जाता है मेरा घर, मेरे घर की दीवारें और चौक – चौबारे बिना तेरे अक्स के चेहरा सब का उतर जाता है सबकी गलियाँ हैं रौशन आफ़ताबी शबनमों से चाँद मेरी ही गली में ही बुझा-बुझा नज़र […]

गीतिका/ग़ज़ल

बे-तनख़्वाह बस इसी काम पर रख लीजिए हमें

आपकी हँसी बिन सके ,आपकी ख़ुशी बिन सके बे-तनख़्वाह बस इसी काम पर रख लीजिए हमें आपको सँवारने में हम भी कुछ तो सँवर जाएँगे मत सोचिए, किसी भी दाम पर रख लीजिए हमें जल कर भी आपकी शफ़क़त* को रोशन रखेंगे अपने घर में लौ के नाम पर ही रख लीजिए हमें कोई भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

कुछ देर में ये नज़ारा भी बदल जाएगा

कुछ देर में ये नज़ारा भी बदल जाएगा ये आसमाँ ये सितारा भी बदल जाएगा कितना मोड़ पाओगे दरिया का रास्ता किसी दिन किनारा भी बदल जाएगा दूसरों के भरोसे ही ज़िंदगी गुज़ार दी वक़्त बदलते सहारा भी बदल जाएगा झूठ की उम्र लम्बी नहीं हुआ करती ये ढोल ये नगाड़ा भी बदल जाएगा गिनतियों […]