बाल कविता

मुन्नी चलती डगमग डगमग

मुन्नी चलती डगमग-डगमग नन्हे-नन्हे क़दम बढ़ाकर मुन्नी चलती डगमग-डगमग। हंसती है तो घर, खुशियों से करने लगता जगमग जगमग। मम्मी की आवाज़ सुने तो झटपट उनकी ओर लपकती पापा से बातें करती तो कम से कम सौ बार अटकती। भैया जब टॉफ़ी दिखलाता तो खुश होकर चहक पड़े वह गुस्सा होने पर, टपकाने लगती आंसू […]

कविता

बालगीत- आरती

आरती घर में सबकी बड़ी दुलारी नन्ही बिटिया आरती । अम्माजी का हाथ बंटाती, कभी काम से ना घबराती चौका-बर्तन करे, और घर- अंगना रोज़ बुहारती । थके, खेत से बापू आते, तुरन्त खाट पर हैं पड़ जाते पैर दबाकर बिटिया उनकी सारी थकन उतारती । बात किसी की नही काटती, दिनभर घर में ख़ुशी […]

कविता

बालगीत : ऐसा कोई जादू हो

जैसे मुझसे दूर हटे माँ होते मेरे आँसू जारी छोटे-छोटे हाथ-पाँव हैं ठीक तरह न चल सकता हूँ जो घुटनों के बल दौडूँ तो मत पूछो, कितना थकता हूँ। माँ की गोदी में जाते ही पूरी होती ख़ुशी हमारी घर में ढेरों काम पड़े हैं सब करने हैं बारी-बारी चैन मिले न इक पल का […]