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  • दोहे रमेश के

    दोहे रमेश के

    इत देखूंँ परिवार या, उत देखूँ मै देश ! जीवन के बाजार मे,ऐसा फँसा रमेश ! ! पिछड़ेपन की देश मे,ऐसी चली बयार ! लगी हुई है होड़ सी , बनने की लाचार !! कर लेगें...

  • नववर्ष पर दोहे

    नववर्ष पर दोहे

    दो हजार सत्रह  चला, छोड सभी का साथ ! हमें थमा कर हाथ में, नये साल का हाथ !! आने को मुस्तैद है , नया नवेला वर्ष ! दिल में सबके प्यार का, दिखे उमड़ता हर्ष...