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  • गीत : समर्पण भाव

    गीत : समर्पण भाव

    अनवरत चलते रहें हम भूल बैठे मुस्कुराना है यही अनुरोध तुमसे बस ख़ुशी के गीत गाना। फर्ज की चादर तले, कुछ मर गए अहसास कोमल पवन के ही संग झरते शाख के सूखे हुए दल रच गया बरबस...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    साल नूतन आ गया है कुछ नया करके दिखाओ स्वप्न आँखों में सजाकर हौसलों के गीत गाओ द्वेष, कुंठा, खूँ-खराबा रात्रि गहराने लगी है लाख गहराये अँधेरा एक दीपक तुम जलाओ तोड़ दो खामोशियों को जुल्म...

  • नवगीत

    नवगीत

    आस्था के नाम पर, बिकने लगे हैं भ्रम कथ्य को विस्तार दो , यह आसमां है कम . लाल तागे में बंधी विश्वास की कौड़ी अक्ल पर जमने लगी, ज्यों धूल भी थोड़ी नून राई, मिर्ची...


  • गजल

    गजल

    जिंदगी जब से सधी होने जाने क्यूँ उनकी कमी होने लगी डूब कर हमने जिया हर काम को काम से ही अब अली होने लगी हारना सीखा नहीं हमने यदा दुश्मनो में खलबली होने लगी नेक...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    फूल बागों में खिले ये सबके मन भाते भी हैं। मंदिरों के नाम तोड़े रोज ये जाते भी हैं। चाहे  माला में गुंथे या केश की शोभा बने टूट कर फिर डाल से ये फूल मुरझाते...

  • गजल

    गजल

    फूल बागों में खिले ये सबके मन भाते भी हैं। मंदिरों के नाम तोड़े रोज ये जाते भी हैं। चाहे माला में गुंथे या केश की शोभा बने टूट कर फिर डाल से ये फूल मुरझाते...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जिंदगी जब से सधी होने लगी जाने क्यूँ उनकी कमी होने लगी डूब कर हमने जिया हर काम को काम से ही अब अली होने लगी हारना सीखा नहीं हमने यदा दुश्मनो में खलबली होने लगी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मेरी साँसों में तुम बसी हो क्या पूजता हूँ जिसे वही हो क्या थक गया, ढूंढता रहा तुमको नम हुई आँख की नमी हो क्या धूप सी तुम खिली रही मन में इश्क में मोम सी...