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  • प..  से प्रेम

    प.. से प्रेम

    प्रेम… उम्र से बढ़कर समय से परे भाषा में कैद नहीं न ही परिभाषा में समाये इतना संवेदनशील कि छुअन से थर्रा जाये इतना मजबूत कि पत्थर से टकरा जाए पारदर्शी ऐसा जैसे कि काँच पर...

  • सृजन

    सृजन

    नहीं आसान   धरती में दबे रह कर खोल से आना बाहर अँकुर का, नींव को पाट कर निर्माण करना इक नई छत का नहीं आसान….. दिन रात का मंथन बताता मर्म जीवन का गर्भ में...

  • हिन्दी

    हिन्दी

    गौरव का है गान हिन्दी भारत की पहचान हिन्दी भाषा सहोदरी है हिन्दी अपना है अभियान हिन्दी जन-जन की मुस्कान हिन्दी मस्तक का है मान हिन्दी उजली विभावरी है हिन्दी सागर का सम्मान हिन्दी गढ़े हिन्दी..पढ़ें...

  • बेटियाँ

    बेटियाँ

    गुड़ियाँ ही नहीं होती बेटियाँ कि सजाई सँवारी जायें होती हैं मनु और पद्मा भी खेल जान पर अपनी देश का गौरव बढ़ायें बेटियाँ होती हैं ममता सींच नये पौधे को उपवन नया बनाये चिड़ियाँ ही...

  • बाबा ……. रे बाबा

    बाबा ……. रे बाबा

    निर्भया जैसी बच्चियों के लिए संवेदना प्रकट करने वाले हमारे समाज के हितकारी लोगो को अचानक ऐसा क्या दिखाई दे जाता है कि राम और रहीम के नाम को कलंकित करने वाले एक पुरुष को महापुरुष...

  • गीत : देखो पिया…किया श्रृंगार

    गीत : देखो पिया…किया श्रृंगार

    देखो पिया…किया श्रृंगार हरी चूड़ियाँ और चुनरिया मेंहदी, पायल,झुमके, हार… सखी-सहेली और ठिठोली हँसतीं सब मस्तों की टोली झूला डला निंबवा की डार.. शुभ व्रत जनम के नाते जोड़े रिमझिम की ये झाड़ियां ओढ़े उपवन गीतों...


  • गीतिका

    गीतिका

    एक टुकड़ा धूप का डूबा अगर एक टुकड़ा रात काली हो गयी बादलों ने तान दी चादर घनेरी चाँद की रंगत रूहानी हो गयी शाम के साये बढ़े दो चार पग झींगुरों के शोर में डूबा...

  • गज़ल

    गज़ल

    कदम कदम पे सूतूर-ए-कहकशाँ कर दे खुदा चाहे तो सितारे ज़मीन पर भर दे सभी के पाँव तले बिछा दे मखमली चादर जमीं चाहें जब रास्तों को गुलिस्तां कर दे झुके तो ज़मीं पर लुटा दे...

  • कविता : सफलता से पहले

    कविता : सफलता से पहले

    सफलता से पहले और असफलता के बाद एक सिरे पर खड़े हम करते हैं संघर्ष बड़े बड़े विमर्श करते हैं हर पहलू पर गौर बनाते हैं रूपरेखा फूँक फूँक कर तब कहीं बढ़ाते हैं कदम आगे...