गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

गलत राहों पर कदम बढ़ाना नही कोई बुलाये मगर फिर भी जाना नही पास किसके है क्या देखते है सभी बंद मुट्ठी इसे खोल दिखाना नही झूठ कह दो उससे झुका के नजर उससे कहो के आँखे मिलाना नही पेड़ चंदन के लोग काट लेते सभी सीधे सादो का अब ये जमाना नही बात हमेशा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जब मिलो हाथ हम से मिलाया करो सब भुला के गले से लगाया करो साथ रह गम हमें भी सताया बहुत साथ रह तुम मिरे गम भुलाया करो सूख जाये नही बाग के पेड़ सब बाग में आ मिरे सींच जाया करो रात भर जाग जिसने सुलाया हमें जागकर पैर माँ के दबाया करो ना […]

अन्य

कभी आया नही

तेरे घर मिलने कभी आया नहीं और तूने भी मुझको बुलाया नहीं दिल की बात तूने दिल में ही रखी दिल की बात मैंने भी बताया नहीं दिल तुझको ये अपना देकर सनम फिर दिल ये किसी से लगाया नहीं रात भर चाँद तारों से बातें करी बिन तेरे सपना मैंने सजाया नहीं याद आए […]

गीतिका/ग़ज़ल

मिलने को आती नही

है कहाँ मुझसे मिलने को आती नही फोन भी लगाऊ तो वो उठाती नही हो गई है क्या बात जो रूठी हो तुम पूछ रहा कबसे मगर तुम बताती नही वो गई जबसे दूर जिंदगी में है गम खुशी दूर हो गई खुशियां आती नही खोया हूँ खयालो में तेरे इसकदर कोई भी आवाज दे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कहाँ गई मेहबूबा मेरी मुझें चाहने वाली रूठकर बैठी कहाँ मुझको मनाने वाली उसकी आँखों मे आँसू देख नही पाता हूँ आँखे भी रोती है देख उसे रुलाने वाली राह चलते चलते भटक गया हूँ रस्ते से कहाँ गई मुझको रहगुजर दिखाने वाली वो जब रूठती थी उसको मना लेता था टूट गई माला मोती […]

गीतिका/ग़ज़ल

नामुमकिन कुछ नही

नामुमकिन कुछ नही सब आसान ही है हर शख्स थोड़ा बहोत परेशान ही है जो चाँद पे गया जिसने अविष्कार किये कोई और नही हमसा एक इंसान ही है संकट के समय मे तुम मेरे काम आये तुम्हारा मुझ पर बड़ा ये अहसान ही है जो कह दिया पत्थर की लकीर समझो दौलत से बड़ी […]

गीतिका/ग़ज़ल

कोरोना बायरस आया ना होता

कोरोना बायरस भारत आया न होता तो लॉकडाउन देश मे लगाया न होता 21 दिनों हम अपने घरो मे नही रहते जो कोरोना ने कहर फैलाया न होता चीन सा आके भारत में करता ये तांडव जो घंटा घंटी ढोल शंख बजाया न होता कोरोना का बायरस फैलता ही जाता जो सोशल डिस्टेंस को बनाया […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

थारा आटोग्राफ फोटो दुपट्टा चाहिए था कहा रहती थारे घर का पता चाहिए था थारे पे एक किताब लिखने का मन है थारे से एक बार मुझे मिलना चाहिए था सोचता जिंदगी खुशियो से भर जाती तन्ने म्हारी जिंदगी में होना चाहिए था मैंने इबादत में हमेशा थारा साथ माँगा थारे सिवाय कुछ और ना […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

किसी से कुछ भी अब छुपाने का नईं जो कसम खाई हो तो बताने का नईं बदल गया है दौर बदला है जमाना भरोसा अब करना ज़माने का नईं ग़म में डूबे हो फ़िर भी मुस्कुराते रहो ग़म अपना किसी को दिखाने का नईं प्यार में मिल जाए जो धोखा तुम्हे तो फिर दिल ये […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तेरे दिल के किसी कोने में रहता हूँ मैं तू कहेगी नही ये बात जानता हूँ मैं लोगों को लगता कि मैं पागल हो गया आईने से हर रोज़ यही पूछता हूँ मैं हम तो है इशारों में बाते करने वाले वो भी आँखों से कहती है आँखों से कहता हूँ मैं उसने ज़िक्र किया […]