गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल –कुछ तुम झुको कुछ हम झुकें

आते तो सभी अकेले हैं इस दुनिया में और जाते भी अकेले ही हैं , पर आने व जाने के मध्य जो संसार-व्यापार है, यही ज़िंदगी है और हर लम्हा खुश खुश जीना ही जीना है | इस ज़िंदगी के सफ़र में किसी हमसफ़र का होना उसे सुहाना सफ़र बना देता है | सफ़र को […]

मुक्तक/दोहा

दोहे : पावन पर्व महान

लक्ष्मी गणपति पूजिए, पावन पर्व महान , बाढ़े विद्या बुद्धि धन, मानव होय सुजान.   हिया अंधेरौ मिटि रहै, जागै अंतर जोत , हिलि-मिलि दीपक बारिए, सब जग होय उदोत |   बहुरि रंग की फुरिझरीं, बरसें धरि बहु भाव , भाव तत्व पर एकसौ, याही माखन भाव |   रंग-बिरंगी झलरियाँ, गौखन लुप-झुप होत […]

गीतिका/ग़ज़ल

हिन्दी गज़ल : गज़लोपनिषद

एक हाथ में गीता हो और एक में त्रिशूल | यह कर्म-धर्म ही सनातन नियम है अनुकूल | संभूति च असम्भूति च यस्तदवेदोभय सह , सार और असार संग संग नहीं कुछ प्रतिकूल | ज्ञान व संसार- माया, साथ साथ स्वीकारें , यही जीवन व्यवहार है संस्कृति का मूल | पढ़ें लिखें धन कमायें ,परमार्थ […]

कविता

हिन्दी की रेल

हिन्दी की ये रेल न जाने, चलते चलते क्यों रुक जाती | जैसे ही रफ़्तार पकडती, जाने क्यूं धीमी हो जाती | कभी नीति सरकारों की या, कभी नीति व्यापार-जगत की | कभी रीति इसको ले डूबे, जनता के व्यवहार-जुगत की | हम सब भी दैनिक कार्यों में, अंग्रेज़ी का पोषण करते | अंग्रेज़ी अखबार […]

भाषा-साहित्य

हिन्दी के विरुद्ध षडयंत्र

स्वतन्त्रता के आन्दोलन के साथ हिन्दी की प्रगति का रथ भी तेज़ गति से आगे बढ़ा और हिन्दी राष्ट्रीय चेतना की प्रतीक बनी| स्वाधीनता आन्दोलन का नेतृत्व यह जानता था कि लगभग १००० वर्षों से हिन्दी सम्पूर्ण भारत की एकता का कारक रही है| संतों, फकीरों, व्यापारियों, तीर्थयात्रियों, सैनिकों आदि के माध्यम से यह भाषा […]

कविता

अतुकांत कविता : आस्था व रोटी

आस्थाएं , धर्म की,ज्ञान की या कर्म की; मानव ही बनाता है। सम्यगज्ञान,सम्यग दृष्टिकोण ,सम्यग भाव , एवं सम्यग व्यवहार से सजाता है। ताकि ,जीवन चलता रहे , प्रगति के पथ पर , सहज,सरल,सानंद। समाज की धारा बहती रहे , सतत ,अविरल,गतिरोध रहित , बहती नदिया के मानिंद । जन जन को उपलब्ध रहे ,एक […]

भाषा-साहित्य

अगीत कविता : एक परिचय

अगीत कविता विधा महाप्राण निराला से आगे मुक्त अतुकान्त छ्न्द की नवीन धारा है, जिसने सन्क्षिप्तता को धारण किया है; जो आज के युग की आवश्यकता है। यह ५ से ८ पन्क्तियॊ की कविता है। यथा— मानव व पशु मॆं यही है अन्तर, पशु नहीं करता , छ्लछन्द और जन्तर- मन्तर। शॆतान ने पशु को, […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल : आतंक की फसल

टूट्ते आईने सा हर व्यक्ति यहां क्यों है .हैरान सी नज़रों में ये अक्स यहां क्यों है।   दौडता नज़र आये इन्सान यहां हरदम इक ज़द्दो ज़हद में हर शख्श यहां क्यों है।   वो हंसते हुए गुलसन चेहरे कहां गये हर चेहरे पै खोफ़ का ये नक्श यहां क्यों है।   गुलज़ार रहते थे […]

गीत/नवगीत

कारण कार्य व प्रभाव गीत ——कितने ज्ञान दीप जल उठते

          मेरे द्वारा सृजित, गीत की  एक नवीन -रचना-विधा -कृति में ..जिसे मैं ….‘कारण कार्य व प्रभाव गीत‘ कहता हूँ ….इसमें कथ्य -विशेष का विभिन्न भावों से… कारण उस पर कार्य व उसका प्रभाव वर्णित किया जाता है …. इस छः पंक्तियों के प्रत्येक पद या बंद के गीत में प्रथम दो पंक्तियों में मूल विषय-भाव […]

इतिहास

धरती का वास्तविक इतिहास

धरती का इतिहास वास्तविक रूप में भारतवर्ष का इतिहास ही है | सृष्टि, मानव व मानवता वहीं से प्रारंभ हुई, वहीं से समस्त विश्व मे प्रसारित व निर्देशित हुई, भारतीय सभ्यता व संस्कृति के पतन व उद्भव से ही विश्व मानव-संस्कृति का पतन व उद्भव संचालित व नियमित होता रहा | इस विषय को स्पष्ट […]