कविता

प्यार

प्यार से ही कायम है प्यारे यह नश्वर संसार. फिर भला लोग क्यों कर रहे प्यार से ही इंकार. प्यार जीव की जींस में भरी हुई अफरात. प्यार ढ़ूंढते घूमते जीव सब पूरे दिन औ रात. प्यार के भाव का यदि कभी जग में पड़ा अकाल. जीव सभी इस सृष्टि के हो जाएंगे बदहाल. प्यार […]

कविता

इम्तिहान…

दूसरों के प्रश्न जब परखते हैं आप का ज्ञान. सच इसे ही हम सब कहते हैं इम्तिहान. प्रश्नों के जवाब बताते हैं आपका ज्ञान. ये दिखाते हैं आप कैसे करते हैं शब्द संधान. आपकी बौद्धिक कुशलता को बताते हैं उत्तर. दिखाते हैं लिखाई के प्रति आप कितने तत्पर. जब भी आप कहीं देने पहुंचे इम्तिहान. […]

कविता

अपना हिंदुस्तान…

धन्य धन्य हो पांव पखारे जिसके विस्तृत सागर. जिसकी माटी में रमने को आतुर रहे नटनागर. बारी बारी आ देवों ने डेरा यहां जमाया. जिनकी यश गाथा को ऋषियों मुनियों ने है गाया. राम. कृष्ण और महादेव भी जिसके रहे दीवाने. चार वेदों में पसरे हैं युग युग के अफसाने. असुरों के संहार की खातिर […]

कविता

पेट भरता है….

नेताओं के भाषण से नहीं राशन से ही पेट भरता है. राशन जुटाने में आम आदमी का दम निकलता है. आज के नेताओं का अजीबोगरीब अंदाज अखरता है. सत्ता मिलते ही वह जनता की खामियां निरखता है. पानी तब सिर से भी ऊपर चला जाता है. जब वोट लेने वाला नेता वोटरों के ऐब गिनाता […]

कविता

लोग

मौसम की तरह बदल जाते हैं अब लोग. इरादतन वो कर रहे शायद नहीं ये संयोग सुना था गुफ्तुगू ख्वाबों में भी हो जाती है ये बात और है कि ऐसा कर पाते हैं चंद लोग वैसे चाह की राह में रोड़ा नहीं कोई बन सकता. इरादा पक्का हो तो मिलन का सबब बन सकता. […]

कविता

दर्द

अब्र ए दर्द जब दिल पर घुमड़ आते हैं. लाख रोके कोई पलकों को नम कर जाते हैं. बहुत मुश्किल है दीवार ए सब्र को महफूज रखना. दर्द बेइंतहा हो तो कांच से बिखर जाते हैं बहुत सोचा कि दिल की बात दिल में ही रहे तेरी चाहत का जादू ऐसा लब खुद ही थिरक […]

कविता

धीर वीर

समय कापुरुषों का साथ कभी नहीं देता. वे तमाम उम्र बस रोते और पछताते हैं. धीर वीर बस जब तब दावे नहीं करते. वे अपनी करनी से इतिहास मोड़ जाते हैं. वीरों को कभी अंजाम डरा नहीं पाया. उन्हें कभी दूसरों की फिक्र ने नहीं सहमाया. वो करते हैं हमेशा अपने दिल की. इसी नाते […]

कविता

फिक्र

कहना बहुत आसान है तनिक फिक्र न करो. जैसे सब कुछ सहो फिर कहो जिक्र न करो. फिक्र इंसान की अनचाही मानसिक फितरत है. उससे मुक्त हो सकें नहीं सबमें इतनी कूव्वत है. फिक्र दूर करने की कवायद का नतीजा है दुनिया. चल अचल सब कुछ नश्वर है समझा गए हैं गुनिया. पर इंसान संग्रह […]

गीत/नवगीत

जागो जागो बुंदेलखंड जागो

जागो जागो बुंदेलखंड जागो जागो जागो बुंदेली युवा जागो हाथ दोनों उठाके राज मांगो बदलो तदवीर से अपनी किस्मत छोड़ दो मौन रहने की आदत गरजना करने हक अपने मांगो जागो जागो बुंदेलखंड जागो जागो जागो बुंदेली युवा जागो आजादी का जश्न मनाते गुजरे सालोंसाल पर देखो बुंदेलखंड को है कितना बदहाल लुट रहा यहां […]

इतिहास

डॉ राजेंद्र प्रसाद के विचारों को आत्मसात किया जाए

देश के प्रथम राष्ट्रपति डा- राजेंद्र प्रसाद राष्ट  के सर्वांगीण विकास के लिए अच्छे नागरिकों को अत्यावश्यक मानते थे। उनकी सोच यही थी कि किसी भी राष्टरू के लिए सबसे महत्वपूर्ण है चरित्र। आज जब देश में हर तरफ भ्रष्टाचार और घोटाले का अनुनाद सुनाई पड़ रहा है। ऐसे में डा राजेंद्र प्रसाद के विचार और भी प्रासंगिक नजर आते […]