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  • कलियां ही ग़र तुम तोड़ोगे

    कलियां ही ग़र तुम तोड़ोगे

    कलियां ही ग़र तुम तोड़ोगे तो पुष्प कहाँ से लाओगे। अपना सूना आँगन फिर, तुम किससे महकाओगे। क्यों निर्मम हत्याएँ तुम, अविकसित कलियों की करते हो। क्यों नन्हें नन्हें पग चिन्हों से, तुम गलियां सूनी करते...


  • आकृति

    आकृति

    ……आकृति………. मैं एक  क्षण भी  दूर  नहीं  हूँ, मैं तुझमे ही  ,हरपल  रहता हूँ, मैं तुम्हारी कलाई का गजरा हूँ, मैं  तुम्हारी  मांग का  सिंदूर हूँ, मैं   तुम्हारे   माथे का चन्दन हूँ, मैं  तुम्हारे   हाथों  का...


  • मासूम बच्चे

    मासूम बच्चे

    साहब, मैंने  दर्द  पढ़ा  नहीं, देखा  है,  मैंने  भूखे  प्यासे बच्चों   को  रोते   देखा  है। मैंने  स्टेशन   पर     उनको , बचपन    खोते    देखा  है। ये साहब ,ये साहब दिन भर चिल्लाते हैं,  जूते...

  • प्रहरी

    प्रहरी

    वो सीमा का प्रहरी है, किसी से कुछ न कहता है, हर विपदा को सहता है, वो केवल मौन रहता है। हर उत्सव महोत्सव, वो सीमा पर मानता है, तुम दीपक जलाते हो, वो दिल को...