धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

यह अंधेरगर्दी कब तक?

देवदत्त पटनायक काल्पनिक उपन्यास लिखने वाले लेखक है जिनके विषय मुख्य रूप से पौराणिक देवी-देवता होता हैं। आपके उपन्यास न केवल तथ्य रहित होते है बल्कि वैदिक सिद्धांतों से भी कोसो दूर होते हैं। मेरे विचार से यह व्यापार तुरंत बंद किया जाना चाहिए क्यूंकि इसके दूरगामी परिणामों पर कोई ध्यान नहीं देता। आज हमारी […]

सामाजिक

रामरहीम कांड को लेकर विभिन्न लोगों की प्रतिक्रियाएं/विचार

1. रामरहीम के अंधभक्त- हमारे “पिता जी” ने ऐसा कुछ नहीं किया है। उन्हें जानकर फंसाया जा रहा है। वे निर्दोष है। वे तो समाज सेवा का बहुत काम करते हैं। 2. रामरहीम के पूर्व भक्त- आखिर पाप का घड़ा एक न एक दिन फूटता अवश्य है। रामरहीम को उसके किये पापों की सजा मिल […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

संगठन में शक्ति

एक दिन एक राजा ने मंत्री से कहा, “मेरा राज्य के योग्य प्रजाजनों को सम्मानित करने का विचार है, आप मुझे बताये की उनका चुनाव कैसे हो?” मंत्री ने कुछ सोच कर उत्तर दिया ,”राजन, आपके राज्य में योग्य जन तो बहुत हैं, मगर उनमें एकता का सर्वथा आभाव हैं। वे अपनी शक्ति एक दूसरे […]

राजनीति

दलित-मुस्लिम एकता का सच

स्वामी श्रद्धानन्द अविभाजित भारत में कांग्रेस के ऐसे पहले सदस्य है जिन्होंने कांग्रेस से इस कारण से त्यागपत्र दे दिया था क्यूंकि महात्मा गांधी को बार बार दलितों के साथ हो रहे अत्याचारों से अवगत करवाने के बाद भी गांधी जी ने गंभीरता से दलित उत्थान का कार्य में रूचि नहीं दिखाई। उल्टा गांधी जी […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

हिन्दुओं की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार है?

असाम ब्रह्मपुत्र नदी और घने जंगलों का सुन्दर प्रदेश चिरकाल से हिन्दू राजाओं द्वारा शासित प्रदेश रहा है। असाम में इस्लाम ने सबसे पहले दस्तक बख्तियार खिलजी के रूप में 13 वीं शताब्दी में दी थी। बंगाल पर चढ़ाई करने के बाद खिलजी ने असाम और तिब्बत पर आक्रमण करने का निर्णय किया। अली नामक […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

बौद्धिकता के नाम पर वैचारिक प्रदूषण

हमारे देश में एक विशेष जमात हमारी परम्पराओं और धार्मिक मान्यताओं पर निरंतर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कुठाराघात करने में लगी रहती हैं। इस वर्ग विशेष के अनेक नाम हैं जैसे मानवाधिकार कार्यकर्ता, एक्टिविस्ट,सिविल सोसाइटी, शहरी नक्सली, साम्यवादी, सेक्युलर, टुकड़े-टुकड़े गैंग, NGO वाला आदि। परन्तु इनका एक ही उद्देश्य है “तोड़फोड़”। समस्या यह […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

क्या दर्शन नास्तिकता का समर्थन करते है?

टाइम्स ऑफ़ इंडिया समाचार पत्र, 1 फरवरी, 2019, दिल्ली संस्करण के पृष्ठ 18 पर श्री पवन कुमार वर्मा, नेता जनता दल यूनाइटेड का Prayer as well as Profit के नाम से लेख प्रकाशित हुआ। इस लेख में लेखक ने 6 में से 5 दर्शन को नास्तिक बता रहे हैं। दर्शन के विषय में वर्तमान में […]

राजनीति

इस्लामिक बैंकिग और भारत

भारत में मुस्लिम कह रहे हैं कि इस्लाम में ब्याज देना और ब्याज लेना हराम है. इसलिए हम यहाँ ब्याज रहित इस्लामिक बैंकिंग सिस्टम लाएंगे. प्रसिद्द लेखक अरुण शौरी ने एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है The World of Fatwas or The shariah in Action.इसका हिंदी अनुवाद वाणी प्रकाशन, दिल्ली से “फ़तवे, उलेमा और […]

राजनीति

भारतीय मुसलमान और जनरल करिअप्पा

भारतीय सेना के प्रथम सेनापति जनरल करिअप्पा 1964 में अपने द्वारा लिखित पुस्तक “लेट अस वेक अप” में भारतीय मुसलमानों के विषय में लिखते है- “हमारा एक धर्म निरपेक्ष देश है। मैं मुसलमानों को उतना ही अपना भाई-बहन समझता हूँ, जितना कि भारत के अन्य सम्प्रदायों के लोगों को समझता हूँ। देश में अपनी निरंतर […]

सामाजिक

अरुण शौरी की नजर में तलाक और हलाला

प्रसिद्द लेखक अरुण शौरी ने एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है The World of Fatwas or The shariah in Action.इसका हिंदी अनुवाद वाणी प्रकाशन, दिल्ली से “फ़तवे, उलेमा और उनकी दुनिया” के नाम से प्रकाशित हुआ था। इस पुस्तक में पिछले 100 वर्षों में विभिन्न मुस्लिम संस्थानों से मौलवियों द्वारा दिए गए विभिन्न फतवों […]