क्षणिका क्षणिका : ज़िन्दगी धर्म सिंह राठौर 27/04/201527/04/2015 कोशिश तो बहुत की है ज़िन्दगी ने रुलाने की, लेकिन मेरी भी जिद है इसे हंस के बिताने की ! — धर्म सिंह राठौर
कुछ लफ़्ज़ों में बहुत कुछ कह दिया, अच्छा लगा.
धन्यवाद सर