कविता

जिन्दगी खामोश है, ठहर सी गई है …………………………………. 

जिन्दगी खामोश है
ठहर सी गई है,
रंगमंच खाली पड़ा है,
वक्त यूंही निकल रहा है,

मेरी कलम नहीं ठहरी है,
उसे बढ़ना है,
मुझे सम्भालना है,
वक्त यूंही निकल रहा है,

जिन्दगी में कई पात्र देखे,
उनमें ढलने की भी
बहुत कोशिश की मैंनें,
वक्त यूंही निकल रहा है,

जो चाहा उसे पाने की
दूरी बढ़ती ही रही,
ना खत्म होने वाला ये इंतजार,
वक्त यूंही निकल रहा है,

कोई चुभन मन में है,
कोई घात लिए बैठा है,
रास्ते बुलाते हैं मुझे,
वक्त यूंही निकल रहा है,

बर्फ पुरी पिघलती नहीं
फिर से जमने लगती है,
शिकायत दूर होने से पहले ही
वक्त यूंही निकल रहा है,

खामोशी टूटेगी एक दिन,
मेरी चेतना मेरा चिन्तन,
कुछ तो भरेगा मन को
वक्त यूंही निकल रहा है,

हर पौधे का अनुराग है,
अनुरक्त भी और नव जीवन भी,
मैं क्यों पतझड़ बना हूँ अब तक,
वक्त यूंही निकल रहा है,

दो ह्दय की मध्यस्था के लिए
दूनिया को खोज लिया,
मन अब तक ना मिले,
वक्त यूंही निकल रहा है,

डॉ. नितिन मेनारिया

डॉ. नितिन मेनारिया नाम : डॉ. नितिन मेनारिया पिता का नाम : श्री शंकर लाल मेनारिया माता का नाम : श्रीमती निर्मला मेनारिया पत्नी का नाम : श्रीमती सुशीला मेनारिया जन्मतिथि : 07 मार्च 1983 जन्म स्थान : उदयपुर (राजस्थान) शिक्षा : बी.ए., बी.एड., एम.ए., एम.एड., पीएचडी (शिक्षा) कम्पयूटर (डिप्लोमा) कार्यसेवा : उप प्रधानाचार्य, बाल विनय मन्दिर उच्च माध्यमिक विद्यालय, उदयपुर प्रकाशीत पुस्तकें : (एकल काव्य संग्रह) ’’कवि की राह’’, ’’कल भी सूरज उगेगा’’ (सांझा काव्य संग्रह) ’’अहसास एक पल’’, ’’सहोदरी सोपान-2’’, ’’शब्द कलश’’, ’’दीपशिखा’’, ’’सत्यम प्रभात’’, ’’अनकहे जज़्बात’’, ’’भारत के प्रतिभाशाली हिन्दी रचनाकार’’, ’’काव्य संगम’’, ’’दिव्यतूलिका’’, ’’नषा-एक अभिशाप’’, ’’नरेन्द्र मोदी-मेरा अभिमान’’ परिचय : डॉ. नितिन मेनारिया जी ने वर्ष 2008 में राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, उदयपुर से हिन्दी साहित्य में परास्नातक करने के पश्चात मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से शिक्षा स्नातक 2011 में एवं शिक्षा निष्णात की उपाधि 2018 में ली। आपने वर्ष 2023 में राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, उदयपुर से शिक्षा के क्षेत्र में विद्यावाचस्पती की उपाधि प्राप्त की। आपके एम.एड. के लघुशोध का विषय ’’प्रधानाचार्य की प्रशासनिक कार्यकुशलता को प्रभावित करने वाले कारक’’ रहा। एवं आपके पीएचडी के शोध का विषय ’’प्रधानाचार्यों की नेतृत्व शैलियाँ, सामाजिक बुद्धि एवं कार्य कुशलता का अध्ययन’’ रहा। आपके लेखन की मूल विधा कविता, कहानी एवं लेख है। लेखक ने वर्ष 2012 से कविताएं लिखना प्रारंभ की और आपका 100 कविताओं का एक काव्य संग्रह ’’कवि की राह’’ वर्ष 2014 में प्रकाषित हो चुका है। आपका 100 कविताओं का दूसरा काव्य संग्रह ’’कल भी सूरज उगेगा’’ वर्ष 2018 में प्रकाशित हो चुका है। आपने अपनी पीछली पुस्तकों में ’’कवि की राह’’ में आपका उद्देष्य एम.एड. करना बताया। जब आपने इसे पूर्ण किया तब आपकी पुस्तक ’’कल भी सूरज उगेगा’’ पाठकों तक पहूंची और उसमें आपका उद्देष्य पीएचडी करना निर्धारित किया हुआ था जिसे आपने वर्तमान में पूर्ण कर लिया है। शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत लेखक का शिक्षा के विस्तार का लक्ष्य निर्धारित है। आपकी रचनाऐं ’समुत्कर्ष’, ’प्रत्युष’, ’नवपल्लव’, ’हिचकी’, ’जयविजय’, ’शिखर विजय’, ’लोकजंग’ पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। आपकी रचनाओं का काव्यपाठ वर्ष 2015 में आकाशवाणी उदयपुर से प्रसारण हुआ है। आपने अनेक काव्य गोष्ठियों एवं काव्य मंचों पर काव्य पाठ भी किया हैं। अब तक 290 से अधिक रचनाऐं, 5 लेख, 1 शैक्षिक लेख, 4 शोध लेख, 3 कहानीयाँ, 3 गीत एवं 5 यात्रा वृतान्त लिखे गये हैं। आपने ’’मेरी डायरी से’’ शीर्षक के अन्तर्गत कई अनकही बातों को 350 से अधिक उद्धरण में लिखा है जो अभी अप्रकाशित है। लेखक का मानस अगली कृति के रूप में डायरी प्रकाशन का है। वर्तमान में डॉ. नितिन मेनारिया अपने पिता के विद्यालय बाल विनय मन्दिर उच्च माध्यमिक विद्यालय, उदयपुर में उप प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं। शिक्षण के अपने निजी व्यवसाय में सेवारत होने के साथ-साथ साहित्य सृजन एवं साहित्य सेवा में संलग्न हैं। सम्पर्क : मोबाईल नम्बर : $91&9413752497 ई-मेल : nitinmenaria2010@gmail.com फेसबुक : https://www.facebook.com/nitin.menaria.1 पता : जे-46, हरिदास जी की मगरी, उदयपुर (राजस्थान) - 313001

One thought on “जिन्दगी खामोश है, ठहर सी गई है …………………………………. 

  • विजय कुमार सिंघल

    यह कविता आपने ५ अगस्त को भी लगायी थी। कृपया नई रचना लगायें।

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