कुण्डली/छंद

कुण्डली : सन पचास लागू हुआ

सन पचास लागू हुआ, अपना शासन तन्त्र
पर्व छब्बीस जनवरी, कहलाया गणतन्त्र
कहलाया गणतन्त्र, विधान बना भारत का
है अधिकार समान, आदमी वा अौरत का
महावीर कविराय, खूब उत्साहित जन-जन
हुआ है फलीभूत, पचास बड़ा ही शुभ सन

— महावीर उत्तरांचली
चलभाष: 9818150516

 

महावीर उत्तरांचली

लघुकथाकार जन्म : २४ जुलाई १९७१, नई दिल्ली प्रकाशित कृतियाँ : (1.) आग का दरिया (ग़ज़ल संग्रह, २००९) अमृत प्रकाशन से। (2.) तीन पीढ़ियां : तीन कथाकार (कथा संग्रह में प्रेमचंद, मोहन राकेश और महावीर उत्तरांचली की ४ — ४ कहानियां; संपादक : सुरंजन, २००७) मगध प्रकाशन से। (3.) आग यह बदलाव की (ग़ज़ल संग्रह, २०१३) उत्तरांचली साहित्य संस्थान से। (4.) मन में नाचे मोर है (जनक छंद, २०१३) उत्तरांचली साहित्य संस्थान से। बी-४/७९, पर्यटन विहार, वसुंधरा एन्क्लेव, दिल्ली - ११००९६ चलभाष : ९८१८१५०५१६