अहसास
तुम्हारी सांसों की गरमाहट
तुम्हारे लबों की थरथराहट
तुम्हारी बातों की कंपकपाहट
क्यों मुझे तुम्हारे नज़दीक ला रही है?
ये अनोखा अहसास……
क्यों मुझे दीवाना बना रहा है
है ये हक़ीक़त या कोई सपना
जो मुझे ख़ुद से ही ख़ुद को चुरा रहा है
$..सुवर्णा..$
तुम्हारी सांसों की गरमाहट
तुम्हारे लबों की थरथराहट
तुम्हारी बातों की कंपकपाहट
क्यों मुझे तुम्हारे नज़दीक ला रही है?
ये अनोखा अहसास……
क्यों मुझे दीवाना बना रहा है
है ये हक़ीक़त या कोई सपना
जो मुझे ख़ुद से ही ख़ुद को चुरा रहा है
$..सुवर्णा..$
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बढ़िया कविता !