कभी जो दिल से आकर के पूछो
कभी जो दिल से आकर के पूछो कि क्या मामला है ये क्या मामला है,
दिखा के आइना वो तुमसे कहेगा कि दिल जिससे लगा है वो ये ही बला है।
जहाँ भी देखूं, जिधर भी झाँकू फरेबी नज़रों में तुम ही तुम हो,
नज़रें मिला के इतना बता दो, क़यामत ढहा दी, ये क्या ज़लज़ला है?
इक दो पहर तो थम सी गयी थी, घड़ी के कांटे भी रुक गए थे,
चिलमन उठा कर झटकी जो ज़ुल्फ़ें, अल्लाह कसम तब ये दिन ढला है।
ढाला है तुझको ग़ज़लों में हमने, लफ़्ज़ों से तेरी इबादत करी है,
करती है दुनिया तो करने दो बातें, नहीं फ़िक्र अब क्या बुरा क्या भला है।
हमारे भी अब कुछ चर्चे हुए हैं, कहानी हमारी भी छपने लगी है,
पिछली दीवाली हम छत पर मिले थे मोहल्ले में कुछ दिन ये मसला चला है।
