कविता

कविता : अप्सरा

तुझे देख चांद जलता होगा
चांदनी को तू चिढ़ाती होगी ।

सूरज को लाली देकर
तू हवाओं को महकाती होगी ।

फूलों में रंग भरकर
तू कलियों को खिलाती होगी ।

बादलों से आस्मां ढक
नदियों को जल से नहलाती होगी ।

तेरी चंचलता चिड़ियों को चहकाती
तेरी मुस्कान कवियों को भाती होगी ।

तू इन्द्रलोक की कोई अप्सरा
तू क्या जाने कैसे
हरदिल पे तेरी मदहोशी छाती होगी ?

मुकेश सिंह
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मुकेश सिंह

परिचय: अपनी पसंद को लेखनी बनाने वाले मुकेश सिंह असम के सिलापथार में बसे हुए हैंl आपका जन्म १९८८ में हुआ हैl शिक्षा स्नातक(राजनीति विज्ञान) है और अब तक विभिन्न राष्ट्रीय-प्रादेशिक पत्र-पत्रिकाओं में अस्सी से अधिक कविताएं व अनेक लेख प्रकाशित हुए हैंl तीन ई-बुक्स भी प्रकाशित हुई हैं। आप अलग-अलग मुद्दों पर कलम चलाते रहते हैंl