कविता

कौन बनेगा रक्षक

आज़ादी दिलवाई हमको , जिन लोगो ने लड़ लड़ के
भूल गये हम सारे उनको , झूठी बाते पढ़ पढ़ के

राणा और शिवाजी जैसा , हमको आज मिलेगा कौन
जयचंदों की भीड़ बढ़ गयी , पृथ्वीराज बनेगा कौन

बहुत दिख गये तानसेन तो , चंदरबरदाई है कौन
बनवीरों की फौज खड़ी है , पन्ना धाई होगी कौन

दुस्शासन हर मोड़ खड़े है , लाज बचाना भारी है
कौन बनेगा केशव बोलो , किसकी जिम्मेदारी है

शिशुपालो की कमी नहीं है , दिन भर गाली गाली है
दुर्योधन से मिले हिफाजत , सबकी मंशा काली है

कौशल्या तो नहीं मिली है , मिले मंथरा दासी अब
रुपये पैसो को ही माने , अब तो काबा काशी सब

चुगली करने वाले दिखते , दसो दिशाये धोबी है
निश्छल कोई कुछ ना कहता , सारी जनता लोभी है

तो ऐसे में कहो वतन की , फुलवारी को सींचे कौन
गड्ढे में है रथ का पहिंया , बैठ धरा पे खींचे कौन

कौन संभाले देश को दुश्मन , से लड़ ले जो अड़ अड़ के
आज़ादी दिलवाई हमको , जिन लोगो ने लड़ लड़ के

मनोज”मोजू”

मनोज डागा

निवासी इंदिरापुरम ,गाजियाबाद ,उ प्र, मूल निवासी , बीकानेर, राजस्थान , दिल्ली मे व्यवसाय करता हु ,व संयुक्त परिवार मे रहते हुए , दिल्ली भाजपा के संवाद प्रकोष्ठ ,का सदस्य हूँ। लिखना एक शौक के तौर पर शुरू किया है , व हिन्दुत्व व भारतीयता की अलख जगाने हेतु प्रयासरत हूँ.